व्यस्थापित ग्राम को पहले व्यवस्थित करें वन विभाग बाद इसके व्यवस्थापन पर करें विचार।
रिकोकला । बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड अंतर्गत बार नवापारा क्षेत्र के निवासी एवं आदिवासी कांग्रेस के जिला सचिव संजीव ठाकुर ने बताया कि बार वनाँचल क्षेत्र में वन विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा भोले भाले वन वासियों को फिर से व्यवस्थापन का लॉलीपॉप देकर उनके विकास में पुनः बाधा डाल कर गुमराह किया जा रहा है ।
संजीव ठाकुर ने बताया कि आज से 14 साल पहले जो 3 गांव व्यवस्थापित किये गये है परन्तु क्या वहा विभाग इन 14 सालो मे कभी जाकर लोगों का हाल चाल जानने का प्रयास किया गया की आप लोग वनांचल छोड़ने के बाद यहां आपके जीवनस्तर मे सुधार आया की नही..?
वन विभाग वाले आज पर्यन्त तक कभी भी उस गाँव का का भ्रमण नही किए और ना ही उन गांव वासियों का हाल चाल जानने का प्रयास किए।वहाँ समस्याओं का भंडार है, पानी 1 घंटे के लिए मिलता है, नगर निगम छेत्र जैसे हालात हो गया है।
70%अनुपजाऊ जमीन होने के कारण खेती करना नामुमकिन साबित हो रहा है अधिकांश किसान गरीबी और आर्थिक समस्या के कारण अपनी जमीन कौड़ी के भाव में बेच कर सड़क पर आ गये है। अगर वन विभाग वालों को विश्वास नहीं है तो वहा जाकर के पता कर सकते है।
संजीव ठाकुर ने बताया कि अगर मेरी बात असत्य होगा तो वहा के लोग इतना परेशान हैं की खुद की परेशानी किसी को बता भी नही पा रहें है इतनी परेसानियों का सामना करना पड़ रहा है आज तक इन तीनो गाँव को राजस्व ग्राम का. दर्जा नही मिल पाया है।बल्कि इन गांवों का अस्तित्व भी खतरा में लगता है किसान पोर्टल में श्रीरामपुर गांव का नाम ही नही दिख रहा बल्कि राजपाल पुर बिजेमाल का टुकड़ा दिखा रहा है क्या सरकार इन तीनो गांवो को पृथक गांव का दर्जा नहीं दे पाया तो उनकी मूलभूत अधिकार, आवश्यकता, समस्याओ का निराकरण तो कोसो दूर की बात है।
संजीव ठाकुर ने कहा कि वन विभाग पहले पूर्व में व्यवस्थापित तीनों गांवो को सभी मूलभूत समस्या का निराकरण करे और उन गांवों को पूर्ण रूप से विकसित करे उसके बाद बचे गांवों का व्यवस्थान के सम्बन्ध में विचार करे अन्यथा नहीं।