Priyanka Gandhi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी और शशि थरूर अपने बेबाक बयानों और शानदार भाषणों के लिए जाने जाते हैं। तिवारी चंडीगढ़ से सांसद हैं जबकि थरूर केरल के तिरुवनंतपुरम से। हाल ही में दोनों नेताओं की विदेश यात्रा पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चर्चा हुई थी। लेकिन जब संसद में इस विषय पर चर्चा का समय आया, तो कांग्रेस ने दोनों को बोलने का मौका नहीं दिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों नेताओं की नाराजगी की चर्चाएँ शुरू हो गईं।
प्रियंका गांधी से मुलाकात, चर्चाओं में तेज़ी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने हाल ही में दोनों नेताओं से मुलाकात की। पहले 29 जुलाई को मनीष तिवारी से उनकी बैठक का वीडियो सामने आया और अब शशि थरूर के साथ उनकी तस्वीर भी वायरल हुई है। यह दोनों मुलाकातें संसद परिसर में ही हुई प्रतीत होती हैं। इस मुलाकात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रियंका गांधी ने दोनों नेताओं की नाराजगी को दूर कर दिया है।
मनीष तिवारी को मिला बोलने का अवसर नहीं
मनीष तिवारी संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बोलना चाहते थे। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने पार्टी को पत्र भी लिखा था ताकि उन्हें चर्चा में हिस्सा लेने का मौका मिले, लेकिन कांग्रेस ने यह अवसर नहीं दिया। इसके अलावा, थरूर से पार्टी के लोकसभा नेता गौरव गोगोई और सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने संपर्क किया, लेकिन थरूर ने इसे अस्वीकार कर दिया और उन्होंने भारतीय पोर्ट्स बिल, 2025 पर बोलने की इच्छा जताई।
VIDEO | Congress MPs Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) and Manish Tewari (@ManishTewari) were seen interacting as they entered Parliament earlier today.#ParliamentSession #monsoonsession2025
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvqRQz) pic.twitter.com/VttjwJTnEF
— Press Trust of India (@PTI_News) July 29, 2025
प्रधानमंत्री मोदी का निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कांग्रेस पर हमला किया। उन्होंने थरूर का नाम लिए बिना कहा कि कुछ कांग्रेस नेताओं को बोलने का अवसर ही नहीं दिया गया। जब प्रधानमंत्री ने विदेश में भारतीय प्रतिनिधि मंडलों की भूमिका का ज़िक्र किया, तो शशि थरूर मुस्कुराते हुए नजर आए। मोदी ने कहा कि हमारी सेनाओं की वीरता और आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश में ‘सिंदूर भावना’ पैदा की, लेकिन कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेता इससे आहत हुए।
राजनीतिक हलचल और सवाल
प्रियंका गांधी की यह सक्रियता कांग्रेस में असंतुष्ट नेताओं को मनाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। वहीं, तिवारी और थरूर की चुप्पी और नाराजगी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस में वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी दूर होगी और क्या संसद में उनके बोलने का अवसर मिलेगा। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएँ पार्टी की एकजुटता पर असर डाल सकती हैं।