20 मई को जिलेभर में दवा दुकानों पर लटकेंगे ताले, मरीजों की चिंता बढ़ी; प्रशासन ने संभाला मोर्चा** *ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हड़ताल, रोजाना दवा लेने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

May 19, 2026

भाटापारा/बलौदाबाजार। जिले में 20 मई को दवा बाजार की रफ्तार थम जाएगी। ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में जिला औषधि विक्रेता संघ ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन करते हुए जिलेभर के मेडिकल स्टोर्स बंद रखने का ऐलान किया है। हड़ताल को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक असर दिखाई देने लगा है। खासकर वे मरीज ज्यादा चिंतित हैं, जिनकी जिंदगी रोजाना की दवाओं पर निर्भर है।

हड़ताल की खबर सामने आते ही मंगलवार देर शाम जिले के कई मेडिकल स्टोर्स में लोगों की भीड़ नजर आई। भाटापारा, बलौदाबाजार, पलारी और सिमगा समेत कई क्षेत्रों में मरीज और उनके परिजन जरूरी दवाओं का एडवांस स्टॉक जुटाने पहुंचे। मेडिकल संचालकों के मुताबिक डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हार्ट और अस्थमा मरीजों की दवाओं की मांग सबसे ज्यादा रही। कई दुकानों में देर रात तक ग्राहकों की आवाजाही बनी रही।

मेडिकल संचालकों ने बताया कि लोग एक-दो दिन की अतिरिक्त दवाएं लेकर जा रहे हैं, ताकि हड़ताल के दौरान परेशानी न हो। पलारी नगर पंचायत समेत जिले के कई मेडिकल संचालकों ने जानकारी दी कि वे हड़ताल का समर्थन करते हुए बुधवार को दुकानें बंद रखेंगे। हालांकि कुछ चयनित मेडिकल स्टोर्स को प्रशासन की अपील पर आपातकालीन सेवाओं के लिए खुला रखा जाएगा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की बैठक लेकर साफ निर्देश दिए हैं कि हड़ताल के दौरान किसी भी मरीज को दवा के लिए भटकना नहीं पड़े। प्रशासन ने जिले के सभी जनऔषधि केंद्रों, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर्स, सरकारी अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम्स में जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपनी नियमित दवाएं पहले से खरीदकर रखें। अधिकारियों का कहना है कि आपात स्थिति के लिए अलग से व्यवस्था की गई है और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी।

इधर, जिला दवा विक्रेता संघ बलौदाबाजार-भाटापारा ने हड़ताल को पूरी तरह सफल बनाने की बात कही है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण छोटे व्यापारियों का कारोबार लगातार प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां नियमों की अनदेखी कर दवाओं की बिक्री कर रही हैं, जिससे स्थानीय मेडिकल संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

संघ ने दावा किया है कि जिले के अधिकांश मेडिकल स्टोर्स बंद रहेंगे। वहीं कुछ मेडिकल संचालकों का कहना है कि वे आंदोलन के समर्थन में तो हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन के साथ सहयोग भी करेंगे।

हड़ताल के बीच सबसे ज्यादा चिंता ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर बनी हुई है, जहां पहले से ही मेडिकल सुविधाएं सीमित हैं। कई गांवों में एक-दो मेडिकल स्टोर्स के भरोसे ही लोग रहते हैं। ऐसे में दवा दुकानें बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ सकती है।

इसी को देखते हुए प्रशासन ने जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा मेडिकल स्टोर्स को खुला रखने की व्यवस्था की है। इन दुकानों से आपात स्थिति में दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। भाटापारा में श्याम मेडिकल (9300956676), बलौदाबाजार में मिरी फार्मेसी (9754473929), सिमगा में साहू मेडिकल (9131608662), कसडोल में महेश मेडिकल (9907464852), पलारी में पायल मेडिकल,
लवन में महामाया मेडिकल (9977511355) और संडी में वसुधा मेडिकल (9753005460) को इमरजेंसी सेवा के लिए चिन्हित किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही अस्पतालों में भी इमरजेंसी दवा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि हड़ताल सिर्फ एक दिन की है, लेकिन इसने जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति और आम लोगों की दवा निर्भरता को फिर सामने ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि बुधवार को बंद का असर कितना व्यापक रहता है और प्रशासन की वैकल्पिक व्यवस्था कितनी कारगर साबित होती है।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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