बसना के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अरेकेल में पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रेमचन्द साव के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने बागवानी, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता का संकल्प लिया।
बसना। पर्यावरण संरक्षण को विद्यालयीन शिक्षा से जोड़ते हुए ‘हर बच्चा बने पर्यावरण प्रहरी’ कार्यक्रम के तहत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अरेकेल में बागवानी एवं कचरा प्रबंधन विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, पौधों के प्रति संवेदनशीलता और कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की समझ विकसित करना रहा। कार्यक्रम का नेतृत्व शिक्षक एवं विज्ञान गतिविधियों के मार्गदर्शक प्रेमचन्द साव ने किया।
बागवानी और कचरा प्रबंधन की दी व्यवहारिक जानकारी
कार्यक्रम में बद्री प्रसाद पुरोहित ने विद्यार्थियों को बागवानी एवं कचरा प्रबंधन के संबंध में उपयोगी और व्यवहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय परिसर, खेत और घर-बाड़ी में लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल, उचित सिंचाई, जैविक खाद का उपयोग तथा स्थानीय पौधों का संरक्षण पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने, कचरे के पुनः उपयोग, जैविक कचरे से खाद बनाने तथा प्लास्टिक के कम से कम उपयोग के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि कचरा अपने आप में समस्या नहीं है, बल्कि उसका गलत प्रबंधन समस्या बनता है। सही तरीके से कचरे का पृथक्करण करने पर उसका बड़ा हिस्सा पुनः उपयोग या पुनर्चक्रण के काम आ सकता है। इस दौरान उन्होंने प्रेरणादायक स्वरचित कविता और कहानी भी प्रस्तुत की।
बच्चों को बनाया पर्यावरण प्रहरी
शिक्षक प्रेमचन्द साव ने अपने उद्बोधन में कहा कि “बच्चे केवल भविष्य के नागरिक नहीं हैं, बल्कि आज के पर्यावरण प्रहरी भी हैं।” उन्होंने कहा कि विद्यालय में बागवानी और कचरा प्रबंधन जैसी गतिविधियां बच्चों को किताबों से बाहर निकालकर प्रकृति और समाज से जोड़ती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कम से कम एक पौधे की जिम्मेदारी लेने, कचरा निर्धारित स्थान पर डालने और आसपास के लोगों को भी स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
शिक्षक हीराधर साव ने भी विद्यार्थियों को स्वच्छता, पौधों की सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके प्रत्येक विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
बाल कैबिनेट और सी.वी. रमन बाल विज्ञान परिषद् ने निभाई सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि रही कि बाल कैबिनेट एवं सी.वी. रमन बाल विज्ञान परिषद् के विद्यार्थियों ने इसमें सक्रिय भूमिका निभाई। विद्यार्थियों ने विद्यालय परिसर की स्वच्छता, पौधों की देखभाल, कचरे के पृथक्करण और पर्यावरण जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नेतृत्व क्षमता, श्रम के प्रति सम्मान, सामूहिक जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि “स्वच्छता केवल अभियान नहीं, आदत बने; बागवानी केवल गतिविधि नहीं, जिम्मेदारी बने।”
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला अरेकेल की इस पहल से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ एवं हरा-भरा रखने की भावना को बढ़ावा मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि एक पौधा, एक स्वच्छ आदत और एक जिम्मेदार विद्यार्थी मिलकर पर्यावरण संरक्षण की बड़ी मुहिम की मजबूत नींव बन सकते हैं।
कार्यक्रम में शिक्षक हीराधर साव, प्रेमचन्द साव, रेखा पाण्डेय, प्राथमिक विद्यालय की प्रधान पाठक रत्ना कर, सहायक शिक्षक आसमा परविन, सरिता सिदार, सफाई कर्मचारी अशोक भोई सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।