कोरबा। भैसमा तहसील के ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन पर कथित बेनामी खरीद और कब्जे की कोशिशों के खिलाफ मंगलवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ किसान सभा (CGKS), जो अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध है, ने किया। किसानों ने तानसेन चौक से रैली निकालकर जिलाधीश कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कलेक्टर टी.आर. भारद्वाज ने किसानों की समस्याएं सुनीं और मामले की जांच के लिए गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व की जांच कराने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ बाहरी गैर-आदिवासी लोग गांव में आकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं और पुराने पंजीयन दस्तावेज दिखाकर जमीन खाली करने का दबाव बना रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वे पीढ़ियों से अपनी जमीन पर खेती कर रहे हैं और आज भी जमीन पर उनका कब्जा है।
गांव के किसानों घसिया राम, पुनिराम, राजेश, तिजराम, भूखनराम, मिलक राम, धनीराम, जीवन सिंह, चमरा सिंह और महेत्तर समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे इन बाहरी लोगों को पहचानते तक नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें बेदखल करने की धमकियां दी जा रही हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष 1990 में कथित रूप से जमीन खरीदे जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि जमीन पर आज तक मूल आदिवासी परिवार खेती कर रहे हैं। एक मामले में मंगल सिंह और भूखन लाल की जमीन पर कथित कब्जा किए जाने के बाद पूरे गांव में भय का माहौल है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू और सीटू के राज्य महासचिव एस.एन. बनर्जी ने कहा कि इससे पहले भी वर्ष 1999 में इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसमें न्यायालय ने आदिवासी भूमि का गैरकानूनी हस्तांतरण मानते हुए पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला दिया था।
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को हस्तांतरण कानूनन अवैध है और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बेनामी सौदों की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से पतरापाली समेत आसपास के गांवों में विशेष शिविर लगाकर वास्तविक भूमि स्वामित्व की जांच करने की मांग की।
प्रशासन ने संबंधित तहसीलदार और पटवारी को गांव में शिविर लगाकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। किसान सभा और सीटू ने चेतावनी दी है कि यदि आदिवासी किसानों के पक्ष में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।