
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में पर्यटकों के सफर को और भी रोमांचक बनाने के लिए एक अनूठी पहल की गई है। वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील के निर्देशानुसार, सफारी गाइडों के लिए दो दिवसीय ‘स्टोरीटेलिंग एवं संवाद कौशल’ कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य गाइडों को केवल सूचना देने तक सीमित न रखकर, उन्हें एक कुशल कहानीकार (Storyteller) के रूप में विकसित करना है, ताकि वे वन्यजीवों के व्यवहार और प्रकृति के रहस्यों को रोचक ढंग से पर्यटकों के सामने रख सकें।
कार्यशाला की मुख्य बातें:
प्रभावी संवाद: विशेषज्ञ प्रशिक्षक संजय कुमार पयासी ने गाइडों को पर्यटकों के साथ आत्मीय संबंध बनाने और प्रभावी बातचीत के गुर सिखाए।
कहानी कहने की तकनीक: सफारी के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को कहानियों के माध्यम से समझाने का अभ्यास कराया गया।
संरक्षण का संदेश: जटिल वन्यजीव संरक्षण नियमों और संदेशों को सरल भाषा में पर्यटकों तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया।
इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
अधीक्षक कृषानू चन्द्राकार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में अनुभवी और नए, दोनों ही गाइडों ने उत्साह दिखाया। वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों से इको-टूरिज्म को मजबूती मिलेगी। जब एक पर्यटक जंगल से अच्छी यादें और ज्ञान लेकर लौटता है, तो वह वन्यजीव संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनता है।
कार्यशाला के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी गोपाल प्रसाद वर्मा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को अभयारण्य के भविष्य के लिए मील का पत्थर बताया।
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