संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की मिसाल बना ग्राम पाटनदादर का आयोजन
बसना। महासमुंद जिले के बसना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाटनदादर में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य एवं बसना विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता मोक्ष कुमार प्रधान शामिल हुए। ग्राम पाटनदादर में पिछले 18 वर्षों से निरंतर शरद पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह परंपरा ग्रामीणों की सांस्कृतिक चेतना, आपसी एकता और अपनी विरासत के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गई है।
कार्यक्रम में शामिल हुए मोक्ष कुमार प्रधान ने ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की तथा लंबे समय से इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए ग्रामवासियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी गांव में 18 वर्षों तक लगातार सांस्कृतिक आयोजन को उत्साह और समर्पण के साथ जारी रखना सराहनीय है। ऐसे आयोजन केवल धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और सहयोग की भावना को भी मजबूत करते हैं।
18 वर्षों की परंपरा, नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
अपने उद्बोधन में मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि ग्राम पाटनदादर में पिछले 18 वर्षों से लगातार शरद पूर्णिमा महोत्सव का आयोजन होना ग्रामीणों की सांस्कृतिक जागरूकता और अपनी परंपराओं के प्रति गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। यह आयोजन गांव की सामाजिक एकजुटता और सामूहिक प्रयासों का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में अपनी लोक संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक आयोजनों को सहेजकर रखना बेहद आवश्यक है। आधुनिकता के दौर में नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब गांव के वरिष्ठजन, युवा और अन्य ग्रामीण मिलकर ऐसे आयोजनों को आगे बढ़ाते हैं, तो बच्चों और युवाओं को अपनी विरासत को जानने, समझने और उसका सम्मान करने का अवसर मिलता है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि शरद पूर्णिमा जैसे पर्व भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। ऐसे आयोजन लोगों को एक मंच पर लाते हैं, आपसी दूरियों को कम करते हैं और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। इससे गांव की सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत होती है।
ग्रामवासियों की एकता और सामूहिक प्रयासों की सराहना
मोक्ष कुमार प्रधान ने ग्राम पाटनदादर के ग्रामीणों की एकजुटता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव की वास्तविक ताकत वहां के लोगों की एकता और सामूहिक सोच में निहित होती है। जब ग्रामीण किसी अच्छी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आते हैं, तो वह परंपरा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाती है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को इसी तरह संजोकर रखें तथा नई पीढ़ी को भी इनसे जोड़ें, ताकि ग्राम पाटनदादर की यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी उत्साह और गरिमा के साथ जारी रहे।
संस्कृति का संरक्षण ही समाज की पहचान
ग्राम पाटनदादर में 18 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा शरद पूर्णिमा महोत्सव सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है। ऐसे पारंपरिक आयोजन ग्रामीण जीवन में आपसी अपनत्व, भाईचारे और सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देते हैं।
जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने महोत्सव के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में जुटे ग्रामवासियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि परंपराओं को जीवित रखना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है।
ग्राम पाटनदादर की यह 18 वर्षों पुरानी निरंतर परंपरा इस बात का उदाहरण है कि जब समाज अपनी संस्कृति को सम्मान देता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है, तो सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत दोनों मजबूत होती हैं।


