4 माह से मानदेय नहीं, त्योहार में भी खाली हाथ रसोइया-सफाईकर्मी

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

October 6, 2026

विक्रम राय गुरुजी बोले- 2 से 3 हजार रुपए कमाने वालों के घर चूल्हा जलना मुश्किल, 7 दिन में भुगतान नहीं हुआ तो जिला मुख्यालयों पर होगा प्रदर्शन

रायपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोइया-सहायिकाओं से लेकर स्कूल सफाईकर्मियों और विभिन्न विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। आरोप है कि इन कर्मचारियों को पिछले चार माह से मानदेय और वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।त्योहार के समय भुगतान अटकने से परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम राय गुरुजी ने सरकार पर गरीब और अल्प वेतन पाने वाले कर्मचारियों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना में काम करने वाली अधिकांश रसोइया-सहायिकाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। महज 2 से 2.5 हजार रुपए के मानदेय में वे रोज बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। ऐसे में चार माह से भुगतान नहीं होना उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट है।

सुबह से बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी, फिर भी मानदेय का इंतजार

राय ने कहा कि रसोइया-सहायिकाएं सुबह से स्कूल पहुंचकर बच्चों के लिए भोजन तैयार करने से लेकर रसोई की व्यवस्था तक संभालती हैं। कम मानदेय के बावजूद वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। चार माह का भुगतान अटकने से कई परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है।

संविदा सफाईकर्मी और चौकीदार भी परेशान

उन्होंने बताया कि शासकीय कार्यालयों में कार्यरत संविदा सफाईकर्मी, चौकीदार और अन्य कर्मचारियों को भी कथित रूप से कई माह से वेतन नहीं मिला है। वहीं स्कूलों में काम करने वाले सफाईकर्मियों का भी भुगतान लंबित बताया जा रहा है। राय के मुताबिक, करीब 3 हजार रुपए मासिक कमाने वाले सफाईकर्मी के लिए चार माह का भुगतान रुकना परिवार की पूरी आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करता है।

एक तरफ गरीब कल्याण की बात, दूसरी तरफ हक रोक रहे

विक्रम राय गुरुजी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर सरकार गरीब कल्याण और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीब तबके के कर्मचारियों का ही भुगतान महीनों तक रोक दिया जाता है। उन्होंने इसे कथनी और करनी में अंतर बताते हुए तत्काल बकाया राशि जारी करने की मांग की।

7 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो जिला मुख्यालयों पर आंदोलन

विक्रम राय गुरुजी ने शासन-प्रशासन को 7 दिन का समय देते हुए लंबित भुगतान तत्काल करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर छत्तीसगढ़ संकुल शैक्षिक समन्वयक संघ प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन करेगा।

ये हैं प्रमुख मांगें

* मध्यान्ह भोजन कुकिंग कास्ट और सभी संविदा कर्मचारियों के 4 माह के बकाया भुगतान का 7 दिन में निराकरण हो।

* मध्यान्ह भोजन रसोइयों का मानदेय बढ़ाया जाए।

* भविष्य में प्रत्येक माह की 5 तारीख तक मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

* मध्यान्ह भोजन रसोइयों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

सभी स्कूल सफाईकर्मियों को नियमित किया जाए।

राय ने कहा कि गरीब कर्मचारियों के परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार को इसे महज प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय न मानकर तत्काल राहत देने का निर्णय लेना चाहिए। भुगतान में और देरी हुई तो आंदोलन की स्थिति बनेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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