बलौदाबाजार। 19 अगस्त 2026 कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देशानुसार बुधवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़े संकुल स्तरीय संगठनों की महिला स्व-सहायता समूहों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और सोलर पैनल इंस्टालेशन के साथ वेंडर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से अवगत कराना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान CSPDCL के अधिकारियों एवं तकनीकी विशेषज्ञों ने महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को सोलर पैनल की स्थापना, रखरखाव और संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी। इसके साथ ही सोलर उपकरणों के उपयोग के दौरान बरती जाने वाली आवश्यक सुरक्षा सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
विशेषज्ञों ने महिलाओं को सोलर वेंडर के रूप में पंजीयन कराने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी। इसका उद्देश्य महिलाओं को भविष्य में आधिकारिक रूप से सोलर क्षेत्र से जोड़कर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न संकुल स्तरीय संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें मुख्य रूप से सीएलएफ समूह लाहौद, सोनाखान, वटगन-बनसांकरा और करहीबाजार की महिला सदस्य शामिल हुईं। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने सोलर तकनीक और वेंडर पंजीयन से संबंधित जानकारी प्राप्त की तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी विशेषज्ञों से किया।
अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देने से न केवल गांवों में स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। सोलर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग को देखते हुए प्रशिक्षित महिलाएं भविष्य में इंस्टालेशन, रखरखाव और संबंधित सेवाओं के माध्यम से अपनी आय के अवसर बढ़ा सकती हैं।
उपस्थित कार्यक्रम में CSPDCL के अधीक्षण अभियंता जी.पी. अनंत, कार्यपालन अभियंता ए.के. ठाकुर सहित एनआरएलएम और जिला पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
बलौदाबाजार जिले में महिला स्व-सहायता समूहों को सोलर पैनल इंस्टालेशन और वेंडर रजिस्ट्रेशन का प्रशिक्षण दिए जाने से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। यह प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा के विस्तार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी मददगार साबित हो सकता है।