हर पर्व पर प्रकृति को उपहार: ग्राम चांदन के बेहर सिंह और सुमिंत्रा पालेश्वर ने पीपल-बरगद रोपकर पेश की पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल
ग्राम चांदन:(विरेन्द्र सेन)-वर्तमान समय में जहां एक ओर विकास की अंधी दौड़ में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्राम चांदन निवासी श्री बेहर सिंह पालेश्वर और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुमिंत्रा पालेश्वर ने पर्यावरण संरक्षण की एक अनुकरणीय पहल शुरू की है। यह दंपती समाज के लिए मिसाल पेश करते हुए हर छोटे-बड़े पर्व व विशेष अवसर पर पारंपरिक रूप से बरगद और पीपल के पौधों का रोपण करते हैं।
पालेश्वर दंपती का मानना है कि त्योहारों की असली सार्थकता प्रकृति की रक्षा और संवर्धन में है। पर्वों की खुशियों को यादगार बनाने के लिए वे बरगद और पीपल जैसे दीर्घायु और छायादार वृक्षों को प्राथमिकता देते हैं।
पौधारोपण के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए श्री बेहर सिंह पालेश्वर ने बताया:
- प्रचुर ऑक्सीजन और शुद्ध हवा: बरगद और पीपल वातावरण को सबसे अधिक ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर वायु को शुद्ध रखते हैं।
- तापमान नियंत्रण: इन विशाल वृक्षों की सघन छाया भीषण गर्मी में शीतलता प्रदान करती है और स्थानीय स्तर पर तापमान को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है।
- जैव विविधता का संरक्षण: ये वृक्ष अनेक पक्षियों, कीटों और छोटे जीवों का प्राकृतिक आश्रय स्थल बनते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है।
बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में पालेश्वर दंपती का यह प्रयास केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा और सुरक्षित भविष्य की नींव है। उनका यह कार्य ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्र के लोगों को यह संदेश देता है कि हर व्यक्ति अपने स्तर पर एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकता है।
”यदि हम प्रत्येक उत्सव, जन्मदिन या मांगलिक कार्य पर केवल एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लें, तो धरती को पुनः हरा-भरा और खुशहाल बनाया जा सकता है।” — श्री बेहर सिंह पालेश्वर