नाग पंचमी पर पारंपरिक नाग-नागिन पूजा में शामिल हुए श्रद्धालु, ग्राम की सुख-समृद्धि की कामना:प्रमोद कुमार साहू

BIRENDRA KUMAR SEN

August 17, 2026

नाग पंचमी पर पारंपरिक नाग-नागिन पूजा में शामिल हुए श्रद्धालु, ग्राम की सुख-समृद्धि की कामना:प्रमोद कुमार साहू

रिकोकला। भगवान भोलेनाथ के आभूषण एवं प्रकृति के रक्षक माने जाने वाले श्री नाग देवता महाराज के पावन पर्व नाग पंचमी के अवसर पर ग्राम में श्रद्धा, आस्था एवं पारंपरिक लोकसंस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिला। इस अवसर पर समाजसेवी एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रमोद कुमार साहू ने कहा की काका श्री प्रेम डड़सेना जी के निवास पर उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही पारंपरिक नाग-नागिन पूजा एवं आराधना में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

उन्होंने आगे बताया कि पूजा-अर्चना के दौरान विधि-विधान एवं पूर्ण श्रद्धाभाव के साथ नाग-नागिन देवता की आराधना की गई। इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ एवं नाग देवता से ग्राम की सुख-शांति, खुशहाली, समृद्धि, उन्नति एवं निरंतर विकास के लिए मंगलकामना की गई। श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसी पारंपरिक पूजा-अर्चना हमारी लोकआस्था, संस्कृति एवं पूर्वजों से चली आ रही परंपराओं की अमूल्य धरोहर है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करती है।

नाग पंचमी के इस पावन अवसर पर ग्रामवासियों के परिवारों में सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली बनी रहे तथा पूरा गाँव विकास और प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़े, ऐसी सामूहिक मंगलकामना की गई। पूजा के दौरान धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण भक्तिभाव से सराबोर रहा।

पूजा-अर्चना में प्रमुख रूप से वरिष्ठ समाजसेवी श्री रतन सिंह डड़सेना जी, प्रभु सेवक एवं गायन कलाकार श्री पंचराम डड़सेना जी, प्रभु सेवक एवं मांदर वादक श्री नंद कुमार डड़सेना जी, प्रभु सेवक श्री प्यारी डड़सेना जी, बैगा श्री खगेश्वर जगत जी, श्री पुनीत राम डड़सेना जी, श्री यशवंत डड़सेना जी, श्री गंगादिन डड़सेना जी, श्री सेवक डड़सेना जी, श्री सुखिराम डड़सेना जी एवं श्री रतिराम डड़सेना जी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं सेवकगण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने हर-हर महादेव एवं नाग देवता महाराज की जय के जयघोष के साथ समस्त ग्रामवासियों के सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि पूर्वजों से चली आ रही ऐसी परंपराओं का संरक्षण एवं आने वाली पीढ़ियों तक उनका हस्तांतरण समाज और संस्कृति की निरंतरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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