शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग को 5% छूट व रिक्त पद बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

SARJU SAHU

August 8, 2026

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मांगें अब तेज होने लगी हैं। छत्तीसगढ़िया सर्व समाज एससी, एसटी, ओबीसी के पदाधिकारियों ने शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता में 5 प्रतिशत की छूट देने और शिक्षक भर्ती के रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव के नाम अपर कलेक्टर रवि साहु को ज्ञापन सौंपा।

पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक एवं शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए जारी अधिसूचना में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दिव्यांग एवं महिला अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता में 5 प्रतिशत की छूट दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है। इससे आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है, जिन्होंने शिक्षक बनने की तैयारी में हजारों रुपये खर्च कर डीएड, बीएड और टीईटी जैसी आवश्यक योग्यताएं हासिल की हैं।

5 प्रतिशत छूट का स्पष्ट प्रावधान करने की मांग

समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके कक्षा 12वीं अथवा स्नातक में 50 प्रतिशत से कम, लेकिन 45 प्रतिशत से अधिक अंक हैं। पूर्व की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शैक्षणिक योग्यता में 5 प्रतिशत की छूट का लाभ दिया गया था। ऐसे में वर्तमान भर्ती में भी इस छूट को स्पष्ट रूप से लागू किया जाना चाहिए।

पदाधिकारियों ने कहा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को डीएड और बीएड जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भी निर्धारित नियमों के तहत शैक्षणिक योग्यता में छूट दी जाती है। ऐसे में शिक्षक भर्ती में भी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 5 प्रतिशत की छूट का स्पष्ट प्रावधान किया जाना न्यायसंगत होगा। उन्होंने इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के पूर्व आदेशों का भी हवाला देते हुए सरकार से नियमों को स्पष्ट करने की मांग की है।

कम पदों को लेकर भी उठाई आवाज

ज्ञापन में शिक्षक भर्ती के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के कई प्राथमिक विद्यालय अभी भी एकल शिक्षकीय व्यवस्था से संचालित हो रहे हैं। वहीं अधिकांश मिडिल और हाईस्कूलों में गणित एवं विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण होने की बात पदाधिकारियों ने कही। उनका कहना है कि जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना मुश्किल होगा।

सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पद बढ़ाने की मांग

छत्तीसगढ़िया सर्व समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में जारी शिक्षक भर्ती अधिसूचना में पदों की संख्या जरूरत की तुलना में काफी कम है। इसलिए प्रदेश में रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के पर्याप्त पदों पर भर्ती की जानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक योग्यता में 5 प्रतिशत की छूट का स्पष्ट उल्लेख किया जाए तथा रिक्त पदों की संख्या बढ़ाई जाए। इससे एक ओर योग्य अभ्यर्थियों को रोजगार का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।

ये पदाधिकारी रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने वालों में दिनेश बंजारे, तुलेंद्र सागर सलाहकार, एमएल ध्रुव कार्यकारी जिलाध्यक्ष, दीपक साहू उपाध्यक्ष, राजेश डड़सेना विधि सलाहकार, रेखराज बघेल महामंत्री, टोमन कागजी कोषाध्यक्ष, राजेश रात्रे सदस्य सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।

पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शिक्षक भर्ती के नियमों में आवश्यक स्पष्टता लाएगी और प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए रिक्त पदों की संख्या में बढ़ोतरी करेगी।

संपादक { विज्ञापन‍ }

Share this content:

Leave a Comment