फर्जी सीमांकन के विरोध में बुजुर्ग किसान ने दी आमरण अनशन की चेतावनी,

BHUPENDRA SINHA

June 12, 2026

छुरा / गरियाबंद :- छुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम टेंगनाबासा निवासी 75 वर्षीय लालाराम ध्रुव ने अपनी भूमि के कथित फर्जी सीमांकन को लेकर तहसील प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने तहसीलदार छुरा को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी भूमि का सीमांकन बिना उचित सूचना एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए किया गया, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।

आवेदक के अनुसार, खसरा नंबर 438, रकबा 0.1000 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन 5 दिसंबर 2025 को किया गया था। लालाराम ध्रुव का आरोप है कि सीमांकन की कार्रवाई के दौरान उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई तथा उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र को बुलाकर प्रक्रिया पूरी कर ली गई। उन्होंने सीमांकन पंचनामा में गवाहों के कथित फर्जी हस्ताक्षर किए जाने का भी आरोप लगाया है।

आवेदक ने बताया कि ग्राम टेंगनाबासा किसी व्यक्ति द्वारा उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 438 पर राजस्व अमले को बुलाकर सीमांकन कराया गया और बाद में भूमि पर कब्जा कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण भी कर लिया गया। उनका दावा है कि पूरी सीमांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कर संबंधित गवाहों के बयान लिए जाने पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

लालाराम ध्रुव ने बताया कि कथित फर्जी सीमांकन को निरस्त कर पुनः सही सीमांकन कराने की मांग को लेकर उन्होंने 16 फरवरी 2026 एवं 23 अप्रैल 2026 को भी आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई नहीं होने से क्षुब्ध किसान ने 11 जून 2026 को पुनः आवेदन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर पुनः सीमांकन नहीं कराया गया, तो वे तहसील कार्यालय छुरा के सामने आमरण अनशन प्रारंभ करेंगे।

उन्होंने कहा कि वे एक बुजुर्ग किसान हैं और न्याय की मांग को लेकर लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि अनशन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

इस संबंध में छुरा तहसीलदार मयंक अग्रवाल को मामले से अवगत कराया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।

अब आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आवेदक की शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।

सह संपादक

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