90 दिन पुरानी शिकायत पर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा मामला, 24 घंटे में जांच दल गठन के निर्देश
बसना/महासमुंद। 21 मई 2026 महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के ग्राम बंसुला स्थित विजय कृषि सेवा केंद्र पर खाद की कथित कालाबाजारी का मामला अब जिला प्रशासन के उच्च स्तर तक पहुंच गया है। बुधवार को राष्ट्रीय बजरंग दल के पदाधिकारियों, पत्रकारों और ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर महासमुंद से मुलाकात कर 90 दिनों से लंबित शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा उठाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल जांच के निर्देश देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
कलेक्टर का सख्त संदेश: कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
करीब 45 मिनट तक चली बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने खाद की कालाबाजारी और विभागीय निष्क्रियता से संबंधित दस्तावेज कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए। शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर ने कहा कि खाद की कालाबाजारी सीधे तौर पर जनहित और किसानों के अधिकारों के खिलाफ है। उन्होंने 24 घंटे के भीतर जांच दल गठित कर मौके पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विजय कृषि सेवा केंद्र, बंसुला का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा तथा संचालक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उप संचालक कृषि के बयान पर बढ़ा विवाद
मामले में जब पत्रकारों ने उप संचालक कृषि फगु राम कश्यप से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया तो उन्होंने मीडिया को कोई आधिकारिक जानकारी देने से इनकार कर दिया।
पत्रकारों के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं अपने हिसाब से जांच करूंगा, आपके बोलने से जांच नहीं करूंगा। मेरे को जो जांच करना है मैं अपनी मर्जी से करूंगा।”
उप संचालक के इस बयान के बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में नाराजगी देखी गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि जब शिकायत लंबे समय से लंबित है, तब इस तरह की प्रतिक्रिया प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार विजय कृषि सेवा केंद्र, बंसुला के खिलाफ खाद की कालाबाजारी की लिखित शिकायत 21 फरवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना को सौंपी गई थी,शिकायत में आरोप लगाया गया था कि किसानों को निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर खाद बेची जा रही है। आरोप है कि डीएपी खाद की बोरी 1450 रुपये के बजाय 1800 से 2000 रुपये तक में तथा यूरिया 300 रुपये के बजाय 450 रुपये में बेची जा रही थी। साथ ही कई मामलों में बिना पर्ची और बिना बिल के खाद वितरण किए जाने की भी शिकायत की गई।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पूरे 90 दिन बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ता गया। 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने रखी मांग कलेक्टर से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय बजरंग दल के महामंत्री महेंद्र साव, जिला अध्यक्ष मोहन सोनवानी, पांच पत्रकार तथा 12 ग्रामीण शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा किसानों को न्याय दिलाया जाए। प्रतिनिधियों ने यह भी मांग रखी कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि किसानों का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
महेंद्र साव ने दी 7 दिन की चेतावनी
राष्ट्रीय बजरंग दल के महामंत्री महेंद्र साव ने कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि संगठन जल्द ही इस पूरे मामले की विस्तृत शिकायत राज्यपाल तथा कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों को भी भेजेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।महेंद्र साव ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा और दोषियों को बचाने का कोई प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसानों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर
जिले में खाद वितरण और कृषि सामग्री की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में बंसुला गांव से जुड़े इस मामले में कलेक्टर के सख्त रुख के बाद किसानों और स्थानीय लोगों की निगाहें अब जांच दल की कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला जिले में कृषि आदानों की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।