वन अधिकार पट्टा के नाम पर रिश्वतखोरी का आरोप, कोरबा में पटवारी का वीडियो वायरल, तत्काल निलंबन

SARJU PRASAD SAHU

June 3, 2026

कोरबा के पसान तहसील में वन अधिकार पट्टा ऑनलाइन दर्ज करने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में पटवारी विनोद अग्रवाल निलंबित। नोट गिनते वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने शुरू की जांच।

कोरबा। जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र पसान तहसील से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। वन अधिकार पट्टा ऑनलाइन दर्ज करने के नाम पर ग्रामीणों से कथित रूप से रिश्वत लेने के आरोप में हल्का नंबर-10 (सिर्री-पिपरिया) में पदस्थ पटवारी विनोद अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पिपरिया के तेंदूपारा सहित आसपास के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन अधिकार पट्टा संबंधी कार्यों को ऑनलाइन चढ़ाने के लिए उनसे ₹4 हजार तक की मांग की जा रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि पट्टा प्रकरणों के अलावा फौती नामांतरण और अन्य राजस्व कार्यों के लिए भी पैसे लिए जाते थे। इससे ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी थी।

बताया जा रहा है कि एक ग्रामीण ने पटवारी की कथित रिश्वतखोरी का वीडियो मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में पटवारी टेबल के नीचे नोट गिनते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन तक पहुंच गया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए संबंधित पटवारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

एसडीएम मनोज कुमार बंजारे ने कहा कि शासन और प्रशासन की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है। किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा पद का दुरुपयोग या अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वीडियो सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस कार्रवाई के बाद राजस्व अमले में हड़कंप की स्थिति है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच की गई तो क्षेत्र में लंबे समय से चल रही कई अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। वहीं, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों ने संतोष जताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब है कि वन अधिकार पट्टा आदिवासी और वन आश्रित परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया में रिश्वतखोरी के आरोप सामने आना न केवल शासन की योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जरूरतमंद हितग्राहियों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है। अब लोगों की नजर विभागीय जांच और उसके नतीजों पर टिकी हुई है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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