जंगली जानवरों के आतंक से दहशत में ग्रामीण; वन विभाग की उदासीनता के खिलाफ उग्र आंदोलन की तैयारी-युधिष्ठिर नायक
सोनाखान बलौदाबाजार
बलौदाबाजार जिले का वनांचल क्षेत्र इन दिनों भीषण वन्यप्राणी आतंक और प्रशासनिक लापरवाही की दोहरी मार झेल रहा है। सोनाखान तहसील के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र बार नवापारा, कोठारी, देवपुर, अर्जुनी और सोनाखान सहित दर्जनों गांवों में जंगली जानवरों का इस कदर खौफ है कि ग्रामीणों का सुबह-शाम घर से निकलना भी दूभर हो गया है। वन विभाग की इस घोर उदासीनता और कोई ठोस कदम न उठाने के कारण स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सोनाखान के अध्यक्ष युधिष्ठिर नायक ने मीडिया से चर्चा करते हुए शासन-प्रशासन और वन विभाग पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “हमारे सीधे-साधे ग्रामीण लगातार जंगली जानवरों के हमले का शिकार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।”
नायक ने हाल ही में हुई दर्दनाक घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि:
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- दोनद निवासी जरहू राम की हाथी के हमले में असमय मौत हो गई।
- गजराडीह निवासी देवेंद्र साहू को वनभैंसे ने पटक-पटक कर मार डाला।
- मुरुमडीह निवासी पंच बाई गोंड पर भी जानलेवा हमला हुआ, जिनका इलाज वर्तमान में उनके परिजनों द्वारा अस्पताल में कराया जा रहा है।
”ऐसी दर्जनों अप्रिय घटनाएं हमारे सामने आ चुकी हैं। लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से सुरक्षा के कोई पुख्ता और स्थाई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।”
— युधिष्ठिर नायक, अध्यक्ष (ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, सोनाखान)
विभागीय उदासीनता और ग्रामीणों की सुरक्षा के प्रति सरकार के ढुलमुल रवैये को देखते हुए अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया गया है। ब्लॉक अध्यक्ष युधिष्ठिर नायक ने चेतावनी दी है कि वे अपने तमाम साथियों और क्षेत्र की पीड़ित जनता के हक के लिए एक बड़ा और उग्र आंदोलन करने जा रहे हैं।
इस आंदोलन की रणनीतियां तैयार कर ली गई हैं। बहुत जल्द ही गिधौरी, टुंडरा, गिरौदपुरी, सोनाखान, नवागांव, बार, बया, थरगांव और राजादेवरी समेत आसपास के वनांचल क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और ग्रामीण इस उग्र आंदोलन में शामिल होंगे। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक वन विभाग जंगली जानवरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कोई ठोस और स्थाई कदम नहीं उठाता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।