कसडोल में स्वैच्छिक ग्रीष्मकालीन शिक्षक शिविर, नवाचारी शिक्षण तकनीकों पर हुआ प्रशिक्षण
बलौदाबाजार/कसडोल। 29 मई 2026 ग्रीष्मकालीन अवकाश का रचनात्मक उपयोग करते हुए विकासखंड कसडोल के शासकीय विद्यालयों के शिक्षक इन दिनों अपने व्यावसायिक विकास और शिक्षण कौशल को निखारने में जुटे हैं। टीचर लर्निंग सेंटर (टीएलसी), अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, कसडोल द्वारा आयोजित दो दिवसीय स्वैच्छिक ग्रीष्मकालीन शिक्षक शिविर में बड़ी संख्या में शिक्षक उत्साहपूर्वक भागीदारी कर रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना, उनकी शैक्षणिक दक्षता बढ़ाना और बच्चों के सीखने को अधिक प्रभावी बनाना है।
मई से जून मध्य तक चलने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान जहां अधिकांश शिक्षक अपने निजी और पारिवारिक कार्यों में समय व्यतीत करते हैं, वहीं कई शिक्षकों ने अपनी पेशेवर क्षमता को और बेहतर बनाने के लिए स्वेच्छा से इस प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। शिविर में शामिल होने के लिए शिक्षकों ने पूर्व में निःशुल्क पंजीयन कराया था तथा अपनी सीखने संबंधी रुचियों और आवश्यकताओं को भी साझा किया था।
शिक्षकों की मांग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिविर में टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) निर्माण एवं उपयोग, बालगीतों के माध्यम से शिक्षण, भाषा एवं गणित शिक्षण, कविता आधारित गतिविधियां और स्थानीय मान (प्लेस वैल्यू) जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को नई तकनीकों से अवगत कराया गया।
अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के सदस्यों ने फोर ब्लॉक मॉडल और ईएलपीएस शिक्षण पद्धति पर आधारित डेमो सत्रों के जरिए शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण की बारीकियां समझाईं। कक्षा चौथी की नई एनसीईआरटी हिन्दी पाठ्यपुस्तक में शामिल “चींटी” कविता को आधार बनाकर मौखिक बातचीत, डिकोडिंग, पठन और लेखन प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। कविता पोस्टर, शब्द कार्ड, ध्वनि कार्ड, अक्षर कार्ड और कविता पट्टी जैसे शिक्षण संसाधनों के उपयोग से बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से भाषा सिखाने के उपाय बताए गए।
शिविर के पहले दिन शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। रोल प्ले, बालगीत, खेल, समूह गतिविधियां और नाट्य रूपांतरण जैसे कार्यक्रमों ने प्रशिक्षण को जीवंत और आनंददायक बना दिया। “चींटी” कविता पर आधारित श्रम के महत्व को दर्शाने वाले नाटक में प्रतिभागियों ने प्रभावशाली अभिनय कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली और शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। परिचय सत्र को भी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से संचालित किया गया, जिससे प्रतिभागियों के बीच बेहतर संवाद और सहभागिता का माहौल बना।
टीएलएम के महत्व और उपयोगिता पर आयोजित पैनल चर्चा में ईश्वरी प्रसाद चौहान (प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला घिरघोल), योगेश्वर कुमार साहू (शिक्षक एवं डीआरजी, शासकीय प्राथमिक शाला टेमरी) तथा चंचल साहू (शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला घोड़दा) ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न शैक्षणिक विषयों पर प्रश्न पूछे और व्यवहारिक समाधान प्राप्त किए।
शिविर के प्रमुख उद्देश्यों में शिक्षकों का व्यावसायिक विकास, नवाचारी एवं समावेशी शिक्षण रणनीतियों को बढ़ावा देना, अनुभवों का आदान-प्रदान, ग्रीष्मकालीन अवकाश का रचनात्मक उपयोग तथा शिक्षण सामग्री निर्माण में कौशल विकास शामिल है।
प्रथम दिवस के समापन पर शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण का वातावरण बेहद सकारात्मक और प्रेरणादायक रहा। उन्होंने कहा कि पूरे दिन सीखने की प्रक्रिया इतनी रोचक रही कि समय का पता ही नहीं चला। प्रतिभागियों ने आगामी सत्रों में भी सक्रिय रूप से भाग लेने की इच्छा जताई।
शिक्षकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर उन्हें विद्यालयों में एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्राप्त करने में मदद करेंगे। साथ ही बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणितीय समझ को मजबूत बनाने के लिए नवीन और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को अपनाने का अवसर भी प्रदान करेंगे।