तिरुवनंतपुरम। केरल के पूर्व वित्त मंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. टी.एम. थॉमस इसाक ने राज्य की यूडीएफ सरकार द्वारा पेश किए गए 2026-27 के संशोधित बजट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बजट को “राजनीतिक रूप से पीछे ले जाने वाला, आर्थिक रूप से खोखला और भ्रष्टाचार से प्रभावित” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां सार्वजनिक संसाधनों को निजी कंपनियों के पक्ष में हस्तांतरित करने का रास्ता खोल रही हैं।
डॉ. इसाक ने आरोप लगाया कि बजट में कम अल्कोहल वाले पेयों पर कर की दर 210 प्रतिशत से घटाकर 120 प्रतिशत करने का फैसला विशेष रूप से निजी डिस्टिलरी कंपनियों, खासकर बकार्डी, को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। उनका दावा है कि पिछली एलडीएफ सरकार ने ऐसे प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी थी, जबकि नई सरकार ने सत्ता संभालते ही इस दिशा में कदम उठाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर विधानसभा के भीतर और बाहर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
उन्होंने विझिनजम बंदरगाह परियोजना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। इसाक के अनुसार, अडानी विझिनजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी को बेचने से पहले राज्य सरकार की मंजूरी नहीं ली गई, जबकि पीपीपी समझौते में इसकी अनिवार्यता थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सौदा सार्वजनिक संसाधनों से निजी कंपनियों को असाधारण लाभ पहुंचाने का उदाहरण है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में पूरे केरल को “सी-पोर्ट सिटी” के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पेश की गई है, लेकिन इसके लिए वित्तीय संसाधनों की स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई गई। उनका आरोप है कि सरकार विकास के नाम पर कॉर्पोरेट निवेश को बढ़ावा देकर निजीकरण का एजेंडा आगे बढ़ा रही है।
इसाक ने केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) की आलोचना किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि केआईआईएफबी राज्य के बुनियादी ढांचा विकास के लिए संसाधन जुटाने का एक सफल वित्तीय मॉडल रहा है, लेकिन नई सरकार उसकी साख कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, इससे भविष्य में राज्य की विकास परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने की क्षमता प्रभावित होगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बजट में राजस्व बढ़ाने की कोई ठोस रणनीति नहीं है, जबकि योजना व्यय में कटौती, कल्याणकारी योजनाओं के लिए अपर्याप्त प्रावधान और सरकारी भूमि को निजी निवेशकों के लिए उपलब्ध कराने जैसी नीतियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
डॉ. इसाक ने केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि बजट में केंद्र सरकार की वित्तीय नीतियों और राज्यों के साथ होने वाले असंतुलन पर लगभग पूरी तरह चुप्पी साधी गई है। उनका कहना है कि राज्य की वित्तीय चुनौतियों का समाधान खोजने के बजाय सरकार पिछली एलडीएफ सरकार को जिम्मेदार ठहराने और बड़े-बड़े विकास वादों के जरिए वास्तविक आर्थिक संकट को छिपाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने दावा किया कि यह बजट राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के बजाय सार्वजनिक निवेश और कल्याणकारी ढांचे को कमजोर करने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है।