बसना बना लघु कैलाश विधायक डॉ. संपत अग्रवाल की अगुवाई में रुद्रपूजा, सत्संग और विशाल भंडारा

SARJU PRASAD SAHU

April 28, 2026

बसना। क्षेत्र की पावन धरा ने सोमवार को एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्ष्य दिया, जब स्थानीय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के नेतृत्व में ‘सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन, रुद्रपूजा एवं सत्संग’ का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत माहौल में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने पूरे बसना को मानो ‘लघु कैलाश’ में परिवर्तित कर दिया।

बैजनाथ धाम से पधारे संतों और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की दिव्य प्रतिमा के आगमन के साथ ही वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। विधायक कार्यालय से सिद्धेश्वर शिव मंदिर तक निकली शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। मृदंग, शंख और डमरू की ध्वनि के बीच रुद्राभिषेक और रुद्रपूजा संपन्न हुई, जिससे पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

विधायक डॉ. अग्रवाल ने यजमान की भूमिका निभाते हुए आयोजन की पूरी व्यवस्था संभाली और श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा से किए गए शिव आह्वान से भगवान स्वयं सूक्ष्म रूप में उपस्थित होते हैं। इस अवसर पर श्री श्री रविशंकर के आध्यात्मिक आशीर्वाद का भी उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम में भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सुमित अग्रवाल ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि धर्म और संस्कृति के साथ राजनीति का संतुलन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है। सत्संग के दौरान शिव भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।

आयोजन के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, महिला समूह और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सोमनाथ शिवलिंग का रहस्य: आस्था और विज्ञान का संगम

सनातन परंपरा में प्रथम ज्योतिर्लिंग माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर से जुड़े कई रहस्य आज भी चर्चा का विषय हैं। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद मंदिर के अवशेषों को सुरक्षित रखकर 11 बाण शिवलिंगों के रूप में पूजा जारी रखी गई।

बताया जाता है कि जनवरी 2025 में इन शिवलिंगों को आध्यात्मिक परंपरा के अनुरूप श्री श्री रविशंकर को सौंपा गया। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह शिवलिंग अत्यंत विशेष माना जाता है, जिसमें बेरियम जैसे तत्वों की उच्च मात्रा पाई जाती है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संरचना और चुंबकीय गुण इसे प्राचीन काल में बिना आधार के स्थिर रखने में सक्षम बनाते थे—हालांकि यह आज भी शोध का विषय है।

यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा। विधायक डॉ. संपत अग्रवाल के इस प्रयास की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।

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