नेंगी तालाब के पास चार बोर होने के बाद भी तालाब सूखा, गंदे पानी में स्नान करने को विवश शहरवासी

SARJU PRASAD SAHU

April 21, 2026

सारंगढ़। शहर को ‘तालाबों का गढ़’ कहा जाने वाला सारंगढ़ में एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। नेंगी तालाब के पास चार सार्वजनिक बोरवेल होने के बावजूद तालाब सूखा पड़ा है, जबकि आसपास के गंदे पानी में सैकड़ों शहरवासी नहाने को विवश हैं। नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारियों पर जनसुविधाओं से कोई मतलब न रखने और सिर्फ ‘कमाई’ वाले कार्यों में मशगूल रहने का आरोप लग रहा है।

ऐतिहासिक रूप से सारंगढ़ रियासत के राजा जवाहर सिंह ने नगर बसाते समय तालाबों का बेहद सूझबूझ से निर्माण करवाया था। करीब दो सौ एकड़ में फैली मुड़ा तालाब शहर की मुख्य तालाब है, जो बरसात में जंगल के पानी से लबालब भर जाती है और पूरे साल जमीनी पानी के स्रोत को करीब सौ फीट नीचे बनाए रखती है। यह मुड़ा तालाब बरसात में नेंगी तालाब, खाड़ाबंद तालाब, नया तालाब, तुर्की तालाब, गर्जना तालाब और लोहारीन डबरी को पुलिया-नालियों के जरिए पानी से भर देता है। साल में नौ माह ये तालाब बरसात के पानी से लबालब रहते हैं।

लेकिन गर्मी शुरू होते ही ये सभी तालाब सूखने लगते हैं। तब इन्हें भरने की जिम्मेदारी नगर पालिका की होती है। तालाबों के आसपास स्थित सार्वजनिक बोरवेल कनेक्शन के मार्फत पानी भरने की व्यवस्था नगर पालिका को करनी होती है।

शिकायत है कि नेंगी तालाब पूरी तरह सूख चुका है। तालाब के आसपास लगभग चार सार्वजनिक बोर कनेक्शन होने के बावजूद वे बंद पड़े हैं। यदि इन बोरों को चालू कर दिया जाए तो कुछ ही दिनों में तालाब में पानी भर सकता है, जिससे सैकड़ों शहरवासियों को गंदे पानी में नहाने की विवशता से राहत मिलेगी।

शहरवासियों का आरोप है कि नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी केवल उन कार्यों में रुचि लेते हैं जिनमें उन्हें ‘मलाई’ (अवैध कमीशन) मिलती हो। तालाब में पानी भरने जैसे जनहित के काम में न तो उनकी कोई दिलचस्पी है और न ही इस काम से उन्हें कोई फायदा होता है, इसलिए वे इसे नज़रअंदाज कर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों ने जिला कलेक्टर से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है। उनकी मांग है कि नेंगी तालाब के पास स्थित सार्वजनिक बोरवेलों को तत्काल चालू करने और तालाब में पानी भरने के लिए नगर पालिका के संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कितनी संज्ञान लेता है और क्या आम लोगों को राहत मिल पाती है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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