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कसडोल/बलौदाबाजार।
कसडोल ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत पुटपुरा में सरकारी जमीन पर बेजा कब्जे का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। वर्षों से कुछ लोगों द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। हालात यह हैं कि कब्जाधारी खुलेआम दबंगई के साथ उसी जमीन पर मकान निर्माण भी कर रहे हैं और खेती कर फसल भी उगा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव की करीब दो से ढाई सौ एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। पंचायत स्तर पर इस मामले को लेकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर बेजा कब्जा हटाने की मांग की जा चुकी है और इसकी शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक भी पहुंचाई गई है। शिकायत के बाद राजस्व विभाग कसडोल द्वारा कब्जाधारियों की सूची तैयार कर करीब 15 लोगों को नोटिस जारी किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मकान निर्माण रोकने का आदेश भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कब्जाधारी किसी की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं। जिन लोगों को नोटिस दिया गया, वही लोग खुलेआम मकान बना रहे हैं और जमीन पर खेती भी कर रहे हैं। इससे गांव के लोगों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कब्जाधारियों का रवैया इतना हावी हो चुका है कि वे प्रशासनिक आदेशों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्ती से कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
पुटपुरा गांव में चारागाह और श्मशान के लिए भी पर्याप्त जमीन नहीं बची है। पशुओं को चराने के लिए ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है, वहीं अंतिम संस्कार के लिए भी उचित स्थान की कमी बनी हुई है। जंगल क्षेत्र से लगे इस गांव में पशुपालकों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब राजस्व मंत्री के ही जिले में सरकारी जमीन पर इस तरह खुलेआम कब्जा हो रहा है और आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गांव में आपसी टकराव की स्थिति भी बन सकती है।
इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच ललित पैकरा का कहना है कि कब्जा रोकने के लिए आदेश जारी किया गया है, लेकिन सरपंच होने के नाते उन्हें गांव के सभी लोगों को साथ लेकर चलना पड़ता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कदम उठाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द बेजा कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में गांव में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।
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