गढ़फुलझर नानकसागर में होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, पर्यटन विकास को मिलेगा बढ़ावा

TEKRAM KOSLE

March 15, 2026

रिपोर्टर टेकराम कोसले

बसना/महासमुंद, 15 मार्च 2026। बसना क्षेत्र के ऐतिहासिक और पवित्र स्थल गढ़फुलझर स्थित नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai शामिल हुए। उन्होंने पवित्र गुरुद्वारा परिसर पहुंचकर Guru Granth Sahib के समक्ष माथा टेका और विशेष कीर्तन समागम तथा अरदास में भाग लिया। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री का पारंपरिक सरोपा भेंट कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में कृषि मंत्री Ramvichar Netam, बसना विधायक Sampat Agrawal, डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह, देवेंद्र सिंह आनंद और रोमी सलूजा सहित सिख समाज के बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, येतराम साहू, अखिलेश सोनी, भूपेंद्र सिंह सवन्नी, इंद्रजीत सिंह गोल्डी, अमरजीत छाबड़ा, सरपंच हरप्रीत कौर, कोलता समाज के गिरधारी साहू और चतुर्भुज आर्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
नानकसागर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि पर स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है, जहां सिखों के प्रथम गुरु Guru Nanak Dev के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है और ऐसे धार्मिक स्थलों के विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है और इसके लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। विकास कार्य जारी है और अधिकारियों को इसे शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नानकसागर क्षेत्र के समग्र विकास और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
अमृतसर की तर्ज पर बनेगा भव्य गुरुद्वारा
बसना विधायक संपत अग्रवाल ने कहा कि सिख समाज हमेशा एकजुट होकर समाज के हित में कार्य करने वाला समाज है। उन्होंने जानकारी दी कि गढ़फुलझर में Amritsar की तर्ज पर एक भव्य गुरुद्वारा निर्माण की योजना है, जिससे क्षेत्र की धार्मिक आस्था और पर्यटन दोनों को नई पहचान मिलेगी।
520 वर्ष पुराना ऐतिहासिक संबंध
सिख समाज के प्रतिनिधि रिंकू सिंह ओबेरॉय ने बताया कि लगभग पाँच वर्ष पहले यह तथ्य सामने आया कि करीब 520 वर्ष पूर्व सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी इस पवित्र स्थल पर पधारे थे। उन्होंने गुरु नानक देव जी के ऐतिहासिक आगमन और उनके संदेशों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उल्लेखनीय है कि बसना क्षेत्र का गढ़फुलझर वह ऐतिहासिक स्थान है जहां वर्ष 1506 में गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी (विश्व भ्रमण) के दौरान अमरकंटक और शिवरीनारायण मार्ग से Jagannath Puri जाते समय दो दिनों तक ठहरे थे। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने लगभग 5 एकड़ भूमि गुरु महाराज के नाम समर्पित की थी, जिसे आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है।
भविष्य में बनेगा प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र
इसी पावन स्थल पर देश के प्रमुख गुरुद्वारों की तर्ज पर एक भव्य गुरुधाम निर्माण का प्रस्ताव है। गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है बल्कि सर्वधर्म समभाव की अनूठी मिसाल भी है। यहां अभेद किले के अवशेष, प्राचीन सुरंगें, रानी महल के अवशेष, रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं।
भव्य गुरुधाम के निर्माण और पर्यटन विकास के बाद यह क्षेत्र भविष्य में छत्तीसगढ़ का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बन सकता है, जो आने वाली पीढ़ियों को गुरु नानक देव जी के शांति, सेवा और भाईचारे के संदेश से प्रेरित करता रहेगा।

सह संपादक

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