तुरतुरिया में इको–रिलीज़ियस टूरिज्म की नई पहल वन प्रबंधन समितियों से गठित पर्यटन समिति द्वारा हो रहा सतत संचालन

TEJASWI NATH SONI

January 2, 2026

बलौदाबाजार, 2 जनवरी 2026/

प्रकृति संरक्षण के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत वन परिक्षेत्र बल्दाकछार अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल तुरतुरिया में इको–रिलीज़ियस टूरिज्म की अवधारणा को साकार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करना है।

इस उद्देश्य से गठित “तुरतुरिया संयुक्त वन प्रबंधन एवं पर्यटन समिति” के माध्यम से स्थल का संचालन किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष पौष पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाला तीन दिवसीय प्रसिद्ध मेला इस वर्ष 2 से 4 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

स्थानीय सहभागिता से मजबूत हुआ प्रबंधन

पर्यटन प्रबंधन समिति में आसपास के पाँच ग्राम— खुड़मुड़ी, बफरा, पैरागुड़ा, भिंभोरी एवं ठाकुरदिया— के कुल 21 सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनमें महिलाओं की सहभागिता भी सुनिश्चित की गई है। समिति को न केवल जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं, बल्कि प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार भी प्रदान किए गए हैं, जिससे पारदर्शी और उत्तरदायी प्रबंधन संभव हो सका है।

पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएँ

समिति द्वारा पर्यटकों के लिए व्यवस्थित पार्किंग, सुलभ शौचालय, नियमित साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के कार्य किए जा रहे हैं। समिति द्वारा 23 दिसंबर 2025 से कार्य प्रारंभ किया गया है और पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान एक सप्ताह में लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित की गई है।

पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया की ओर कदम

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए “पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया” अभियान प्रारंभ किया गया है। इसके तहत बांस से निर्मित कूड़ादानों की स्थापना, प्लास्टिक उपयोग को हतोत्साहित करने के प्रयास तथा पोस्टर-बैनर एवं साइन बोर्ड के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

रोजगार और पर्यटन का समन्वय

इस पहल से स्थानीय बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे पर्यटन के साथ-साथ आजीविका संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है। बारनवापारा अभयारण्य से सटे होने के कारण यहाँ पर्यटक प्राकृतिक परिवेश में वन्यप्राणियों का भी सहज अवलोकन कर पा रहे हैं। विकसित गार्डन क्षेत्र पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

भविष्य की योजनाएँ

वनमण्डलाधिकारी श्री गणवीर धम्मशील ने बताया कि भविष्य में समिति द्वारा स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यटन विकास से जुड़ी गतिविधियों को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहयोग से पुरातात्विक सर्वेक्षण की दिशा में कार्य कर तुरतुरिया को एक पुरातात्विक, स्वच्छ, सुंदर एवं सतत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।

ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व

तुरतुरिया का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारी जे.डी. बेगलर ने अपने सर्वेक्षण प्रतिवेदन (1874–75 एवं 1875–76) में यहाँ बौद्धकालीन अवशेष तथा बुद्ध की एक प्राचीन प्रतिमा का उल्लेख किया है। उनके अनुसार उस समय इस स्थल का प्रबंधन बौद्ध भिक्षुणियों द्वारा किया जाता था।

यह पहल न केवल पर्यटन विकास का मॉडल प्रस्तुत करती है, बल्कि धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय सहभागिता का सशक्त उदाहरण भी बन रही है।

सह संपादक

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