नई दिल्ली, 5 जुलाई 2026। वैश्विक समुद्री मार्गों पर बढ़ते सैन्य तनाव और संघर्षों के बीच भारतीय समुद्री नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। जून 2026 के दौरान चार भारतीय समुद्री कर्मचारियों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाओं और नाविकों के अधिकारों पर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारत दुनिया में समुद्री क्षेत्र के सबसे बड़े मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है। वर्तमान में लगभग 3.5 लाख से अधिक भारतीय नाविक दुनिया भर के वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत हैं। वैश्विक व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्गों से संचालित होता है, जिसमें भारतीय नाविक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ओमान की खाड़ी में हमले में तीन भारतीयों की मौत
जून 2026 में एमटी सेटेबेलो नामक तेल टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय समुद्री कर्मियों की जान चली गई। मृतकों में हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा, उत्तर प्रदेश के शिवानंद चौरसिया और आंध्र प्रदेश के पटनाला सुरेश शामिल थे। जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय थे। हमले में 21 भारतीय सुरक्षित बचा लिए गए।
चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से गई एक और नाविक की जान
इसी अवधि में तमिलनाडु के सेकंड ऑफिसर निशांत उर्थनाथन की ओमान के डुक्म पोर्ट पर तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने से मृत्यु हो गई। इस घटना ने समुद्री कर्मचारियों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ट्रेड यूनियन ने उठाई सुरक्षा की मांग
फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने इन घटनाओं के बाद भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा बढ़ाने, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने तथा समुद्री श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
यूनियन के प्रतिनिधियों ने मृतक नाविकों के परिजनों से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा भी दिया है। मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) सहित संबंधित संस्थाओं के समक्ष भी पहल की गई है।
समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा पर बढ़ी बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धग्रस्त और संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में लगातार बढ़ते तनाव के कारण अब वाणिज्यिक जहाज भी खतरे के दायरे में आ रहे हैं। ऐसे में समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा, त्वरित चिकित्सा सहायता और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के प्रभावी पालन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
समुद्री क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि वैश्विक व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले समुद्री कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना केवल संबंधित कंपनियों ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी साझा जिम्मेदारी है।