महासमुंद/सरायपाली, 29 अक्टूबर 2025।
जिला महासमुंद के सरायपाली क्षेत्र से एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिसमें 50 प्रतिशत नेत्रदृष्टि दिव्यांग सहायक शिक्षक राजेश प्रधान पर दिव्यांगता छिपाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का आरोप लगा है। इस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा उच्च अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक को एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
🔹 क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, राजेश प्रधान, जो वर्तमान में शासकीय प्राथमिक शाला बस्तीसरायपाली, विकासखण्ड सरायपाली, जिला महासमुन्द में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, वर्ष 2011-12 की शिक्षक भर्ती में दिव्यांग आरक्षण कोटा के अंतर्गत चयनित हुए थे।
राजेश प्रधान को जिला मेडिकल बोर्ड, महासमुन्द द्वारा दिनांक 26 जून 2007 को 50 प्रतिशत आँख से दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जिसका नवीनीकरण वर्ष 2010, 2013 और 2015 में भी किया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनय शाह नामक व्यक्ति ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से राजेश प्रधान की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों की प्रतिलिपि मांगी। इसके बाद जब कार्यालय जिला परिवहन अधिकारी, महासमुन्द से उनके ड्राइविंग लाइसेंस की प्रति प्राप्त की गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
राजेश प्रधान के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस क्रमांक CG06 20160004695, आवेदन क्रमांक 4138276925, 14 अक्टूबर 2016 को जारी किया गया है, जो LMV (लाइट मोटर व्हीकल) और MCWG (मोटरसाइकिल विद गियर) श्रेणी का लाइसेंस है।
🔹 दिव्यांगता छिपाकर बनाया लाइसेंस — शिकायतकर्ता की आपत्ति
शिकायतकर्ता अभिनय शाह ने आरोप लगाया है कि राजेश प्रधान ने लाइसेंस बनवाते समय आवेदन फॉर्म में अपनी दिव्यांगता छिपाई और परिवहन विभाग को भ्रमित जानकारी देकर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 50% नेत्रदृष्टि दिव्यांग व्यक्ति को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाना नियमों के विपरीत है।
🔹 शिकायत भेजी गई राज्य के उच्च अधिकारियों को
शिकायतकर्ता ने इस प्रकरण की प्रतिलिपि के साथ मुख्यमंत्री, राज्यपाल, गृहमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, परिवहन मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, आयुक्त परिवहन, कलेक्टर एवं एसपी महासमुंद, जिला शिक्षा अधिकारी, एसडीएम, एसडीओ (पुलिस), और थाना प्रभारी सरायपाली सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायत प्रस्तुत की है।
उन्होंने मांग की है कि राजेश प्रधान पर शासकीय पद पर रहते हुए गलत जानकारी देकर लाइसेंस बनवाने और नियमों का उल्लंघन करने के मामले में एफआईआर दर्ज की जाए।
⚠️ सार्वजनिक सुरक्षा पर उठे सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि 50 प्रतिशत नेत्रदृष्टि दिव्यांग व्यक्ति वाहन चलाता है, तो यह न केवल कानूनन गलत है बल्कि जनसुरक्षा के लिए भी खतरा है।
ऐसे व्यक्ति के वाहन चलाने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ गंभीर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
🗣️ जनता में उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि परिवहन विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया, तो विभागीय जांच आवश्यक है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि राज्य के मेडिकल रिकॉर्ड और आरटीओ प्रणाली में बेहतर समन्वय क्यों नहीं है, जिससे ऐसे मामले सामने न आएं।