⚖️ मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया जिला न्यायालय बलौदाबाजार के नव-निर्मित अधिवक्ता कक्ष का लोकार्पण — भाटापारा, सिमगा व कसडोल में सिविल न्यायालय भवनों का भूमि पूजन एवं शिलान्यास

TEJASWI NATH SONI

November 6, 2025

बलौदाबाजार, 6 नवम्बर 2025।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा के करकमलों से आज जिला न्यायालय बलौदाबाजार में नव-निर्मित अधिवक्ता कक्ष (Advocate Chamber) का लोकार्पण एवं भाटापारा, सिमगा और कसडोल में सिविल न्यायालय भवनों का भूमि पूजन और शिलान्यास वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुआ।

 

इस अवसर पर माननीय श्री न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय, पोर्टफोलियो न्यायाधीश, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगण, रजिस्ट्रार जनरल, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता संघ एवं मीडिया प्रतिनिधि सम्मिलित हुए।

 

 

 

🏛️ न्यायिक अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

 

मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि

 

> “बलौदाबाजार जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं के लिए निर्मित नया अधिवक्ता कक्ष अत्यंत उपयोगी होगा। यह अधिवक्ताओं को एक सुसज्जित, सुरक्षित और सुविधायुक्त वातावरण प्रदान करेगा, जिससे न्यायिक कार्यों में दक्षता बढ़ेगी और पक्षकारों को शीघ्र न्याय मिलेगा।”

 

 

 

उन्होंने कहा कि भाटापारा, सिमगा और कसडोल में न्यायालय भवनों का निर्माण न्यायिक व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा तथा यह कदम छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगा।

 

 

 

🏗️ 23 करोड़ से अधिक की लागत से होंगे भवनों का निर्माण

 

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि —

 

बलौदाबाजार जिला न्यायालय अधिवक्ता कक्ष हेतु ₹48.80 लाख,

 

भाटापारा सिविल न्यायालय भवन हेतु ₹8.83 करोड़,

 

कसडोल सिविल न्यायालय भवन हेतु ₹7.04 करोड़,

 

तथा सिमगा सिविल न्यायालय भवन हेतु ₹6.90 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

 

 

इस प्रकार कुल ₹23 करोड़ 26 लाख 90 हजार रुपये की लागत से इन न्यायिक भवनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे जिले में न्यायिक अधोसंरचना को सुदृढ़ आधार मिलेगा।

 

 

 

👨‍⚖️ मुख्य न्यायाधीश ने कहा — अधोसंरचना से बढ़ता है न्याय पर विश्वास

 

मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा —

 

> “किसी भी संस्थान की अधोसंरचना उसके कार्य की गुणवत्ता और कार्यकुशलता को प्रभावित करती है। आधुनिक न्यायालय भवन न केवल न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं के लिए बल्कि आम नागरिकों के लिए भी सुविधा प्रदान करते हैं।”

 

 

 

उन्होंने आगे कहा कि उच्च न्यायालय राज्य सरकार के सहयोग से न्यायालय भवनों, अधिवक्ता कक्षों, डिजिटल सेवाओं और ई-कोर्ट प्रणाली के विस्तार हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।

 

 

 

📍 जिला न्यायपालिका में नई ऊर्जा का संचार

 

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलौदाबाजार-भाटापारा के स्वागत भाषण से हुआ और समापन मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी बलौदाबाजार-भाटापारा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

 

कार्यक्रम में जिला न्यायालय बलौदाबाजार, व्यवहार न्यायालय भाटापारा, सिविल न्यायालय सिमगा और कसडोल के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, कर्मचारी तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि

 

> “सुविधायुक्त वातावरण में कार्य करने से न्याय की गुणवत्ता और न्याय वितरण की गति दोनों में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह समाज में विधि के शासन को और सुदृढ़ बनाएगा।”

सह संपादक

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