पोंड में पानी को लेकर महिलाओं का फूटा गुस्सा, नेशनल हाईवे पर एक घंटे तक चक्काजाम,

BHUPENDRA SINHA

May 11, 2026

पाण्डुका/गरियाबंद :- भीषण गर्मी के बीच ग्राम पंचायत पोंड में वर्षों से चली आ रही पेयजल समस्या ने आखिरकार उग्र रूप ले लिया। पानी की गंभीर किल्लत से परेशान डोंगरीपारा की सैकड़ों महिलाओं ने बुधवार को देवभोग मार्ग स्थित नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। महिलाओं ने घरों से बर्तन, बाल्टी और गुंडी लेकर सड़क पर बैठकर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया, जिससे मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

ग्रामीण महिलाओं का कहना था कि ग्राम पंचायत पोंड में हर साल गर्मी के मौसम में पानी की समस्या विकराल हो जाती है, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया। पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए महिलाओं ने कहा कि केवल आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं दिखता।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने बताया कि डोंगरीपारा में दर्जनों बोर खनन कराए गए, लेकिन एक भी सफल नहीं हुआ। वहीं लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी टंकी भी सूखी पड़ी है।

मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए तीन नए बोर खनन कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद चक्काजाम समाप्त किया गया। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने जिला प्रशासन को सुझाव देते हुए कहा कि कुकदा डैम से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाए, जिससे क्षेत्र की स्थायी जल समस्या का समाधान हो सके।

ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कुछ समय पहले निस्तारी के लिए पानी छोड़ा गया था, लेकिन वह अंचल के कई गांवों के तालाबों तक नहीं पहुंच पाया और हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह गया। लोगों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी केवल दफ्तरों तक सीमित योजनाएं बनाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से उनका कोई सरोकार नहीं है।

वहीं मामले को लेकर जनपद उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी ने भी अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उनकी ही सरकार होने के बावजूद अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात तक नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार तालाबों तक पानी पहुंचाने की मांग की गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने ऐसे अधिकारियों को हटाकर संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की।

सह संपादक

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