खाद्य विभाग आखिर कब जागेगा? जिले में लोगों की सेहत से खिलवाड़, जिम्मेदार कौन?

MOTI LAL

July 23, 2026

✍️ विशेष संपादकीय | MASB NEWS

बलौदा बाजार। जिले के ढाबों, होटलों, रेस्टोरेंट और फास्ट फूड सेंटरों में परोसा जा रहा भोजन आखिर कितना सुरक्षित है? यह सवाल आज हर उस नागरिक के मन में है जो अपने परिवार के साथ बाहर भोजन करता है। आए दिन फूड पॉइजनिंग, पेट संबंधी बीमारियों और दूषित भोजन की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की सक्रियता अक्सर सवालों के घेरे में रहती है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल त्योहारों तक ही सीमित है? दीपावली, होली, रक्षाबंधन जैसे पर्वों पर मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की जांच की तस्वीरें तो दिखाई देती हैं, लेकिन वर्षभर आम जनता को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है?

क्या जिले के ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंटों का नियमित निरीक्षण किया जाता है? क्या यह सुनिश्चित किया जाता है कि रसोई स्वच्छ हो, खाद्य सामग्री मानक के अनुरूप हो, बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल उपयोग में न लाया जा रहा हो, एक्सपायरी सामग्री न परोसी जा रही हो, पीने का पानी सुरक्षित हो तथा कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता के नियमों का पालन किया जा रहा हो?

यदि नियमित जांच होती है, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? और यदि जांच नहीं हो रही है, तो इसकी जवाबदेही किसकी है?

जनता यह भी जानना चाहती है कि जिले में कितने खाद्य प्रतिष्ठानों का लाइसेंस सत्यापित किया गया, कितने खाद्य नमूने लिए गए, उनमें से कितने मानकों पर खरे नहीं उतरे और कितने प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। ऐसी जानकारी समय-समय पर सार्वजनिक होना पारदर्शिता और जनहित दोनों के लिए आवश्यक है।

आवश्यक है कि जिला प्रशासन, खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकाय संयुक्त रूप से नियमित निरीक्षण अभियान चलाएं। कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

MASB NEWS प्रशासन से मांग करता है कि जिले के सभी ढाबों, होटलों, रेस्टोरेंटों और खाद्य प्रतिष्ठानों का व्यापक एवं नियमित निरीक्षण कराया जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध हो सके।

स्वस्थ समाज की नींव सुरक्षित भोजन पर टिकी होती है। यदि भोजन ही असुरक्षित होगा, तो विकास और जनकल्याण के सभी दावे अधूरे रह जाएंगे। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग नियमित निगरानी, पारदर्शी कार्रवाई और कड़ी जवाबदेही सुनिश्चित करे।

— संपादकीय, MASB NEWS

प्रधान संपादक

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