कोरिया। जिले के मनसुख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में पदस्थ एक वार्ड आया पिछले लगभग दो माह से ड्यूटी से अनुपस्थित बताई जा रही है। आरोप है कि उसकी जगह उसका भाई अस्पताल में वार्ड आया का कार्य करता नजर आया। इस मामले ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार अस्पताल के निरीक्षण के दौरान एक व्यक्ति वार्ड आया का कार्य करते हुए मिला। जब इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से जानकारी ली गई तो उन्होंने पहले बताया कि संबंधित वार्ड आया बाहर गई हुई है, जबकि बाद में उसके बीमार होने की बात कही। एक ही मामले में अलग-अलग जवाब मिलने से पूरे घटनाक्रम पर संदेह गहरा गया।
अस्पताल में कार्यरत व्यक्ति के बारे में पूछे जाने पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने उसे जीवन दीप समिति का कर्मचारी बताया। हालांकि उसकी नियुक्ति और भुगतान से संबंधित कोई स्पष्ट जानकारी उनके पास नहीं थी। उन्होंने केवल इतना कहा कि समिति के निर्णय के अनुसार उसे तीन से चार हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि व्यक्ति नियमित रूप से अस्पताल में कार्य कर रहा है तो उसकी नियुक्ति और जिम्मेदारियों का स्पष्ट रिकॉर्ड क्यों नहीं है।
सूत्रों का दावा है कि अस्पताल में कार्य कर रहा व्यक्ति वार्ड आया का भाई है, जो अपनी बहन की जगह काम कर रहा है। जब प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से पूछा गया कि क्या किसी कर्मचारी के स्थान पर उसके परिजन को काम करने की अनुमति है, तो उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसी कोई व्यवस्था नियमों में नहीं है। इसके बावजूद अस्पताल में यह व्यवस्था कैसे संचालित हो रही है, इसका जवाब नहीं मिल सका।
वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों ने भी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। मरीजों का आरोप है कि भर्ती रहने के दौरान उन्हें न तो नाश्ता मिला और न ही भोजन। जबकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से मरीजों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मामले की जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत भर्ती मरीजों के उपचार पर प्रतिदिन लगभग 2100 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इसके बावजूद यदि मरीजों को भोजन और आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो यह अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
एक ओर वार्ड आया की लंबी अनुपस्थिति और उसकी जगह कथित रूप से अनधिकृत व्यक्ति से काम लिए जाने का मामला, तो दूसरी ओर मरीजों को भोजन नहीं मिलने की शिकायतें—इन सबने मनसुख प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है।