जेएनयू में 21 दिनों से अनशन पर बैठी छात्रा नेहा की हालत गंभीर: डॉक्टर अंजलि छाबड़िया ने जताई चिंता, कहा- ‘कोमा में जाने का खतरा’
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्रों, शिक्षा और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। जेएनयू की पीएचडी छात्रा नेहा पिछले 21 दिनों से लगातार केवल पानी पीकर भूख हड़ताल (अनशन) पर बैठी हैं।
जंतर-मंतर पर अनशनरत नेहा की स्थिति की जांच करने के बाद मुंबई की प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अंजलि छाबड़िया ने बेहद चिंताजनक चेतावनी जारी की है। जांच के बाद डॉ. छाबड़िया ने बताया कि नेहा की शारीरिक स्थिति अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है और उनके साथ कोई भी गंभीर स्वास्थ्य दुर्घटना हो सकती है।
स्वास्थ्य बुलेटिन की मुख्य बातें:
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कोमा का खतरा: लगातार 21 दिनों के अनशन के कारण नेहा का शरीर पूरी तरह ढल चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, वह किसी भी समय कोमा में जा सकती हैं या उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
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अंगों पर असर: नेहा का ब्लड शुगर लेवल काफी कम हो गया है और शरीर में यूरिक एसिड का स्तर तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही शरीर में गंभीर इंफेक्शन फैलने की आशंका बढ़ गई है।
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शारीरिक क्षमता में भारी गिरावट: एक महिला के रूप में इतने लंबे समय तक पूरी तरह भूखे रहने से नेहा की शारीरिक क्षमता न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसके दुष्परिणाम उनके भविष्य के स्वास्थ्य पर भी बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
नेहा जेएनयू जैसी प्रतिष्ठित संस्था से पीएचडी की छात्रा हैं। शिक्षा पूरी होने के बाद देश-दुनिया में एक उज्ज्वल करियर उनका इंतजार कर रहा था, लेकिन उन्होंने और उनके युवा साथियों ने अपने निजी करियर की जगह देश, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के अधिकारों के लिए यह कठिन रास्ता चुना।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी यह जंग व्यवस्था की जवाबदेही तय करने और प्रजातंत्र की भावना को जीवित रखने के लिए है।
जंतर-मंतर से आ रही आवाजों में यह बात भी प्रमुखता से उठ रही है कि जहां देश का ध्यान सोनम वांगचुक के अनशन पर केंद्रित है, वहीं जंतर-मंतर पर देश के भविष्य यानी इन युवाओं का जीवन भी दांव पर लगा हुआ है। देश के इन होनहार युवाओं का जीवन और उनकी प्राण रक्षा इस समय सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नागरिकों और समर्थकों से अपील की जा रही है कि वे नेहा और उनके साथी अनशनकारियों के स्वास्थ्य तथा देश में प्रजातंत्र व न्याय की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करें और प्रार्थना करें।