कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण दर में की गई बढ़ोतरी का सकारात्मक असर अब कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है। वर्षों से तेंदूपत्ता संग्रहण पर निर्भर ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक राहत लेकर आया है। नई नीति के तहत पारदर्शी भुगतान और अधिक संग्रहण लक्ष्य ने स्थानीय संग्राहकों में उत्साह भर दिया है।बढ़ी दर से बढ़ेगी आय
तेंदूपत्ता की दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है। इससे संग्राहकों को प्रति बोरा 1,500 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। कोरबा जिले के हजारों परिवारों की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी।रोजगार के नए अवसर
संग्रहण लक्ष्य में वृद्धि से जिले के अधिक ग्रामीणों को मौसमी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। वन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे स्थानीय बाजार भी फले-फूलेंगे।सीधे खाते में भुगतान, बिचौलियों का सफाया
नई व्यवस्था के तहत भुगतान सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में किया जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और संग्राहकों को उनका पूरा हक मिलेगा। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
नई तेंदूपत्ता नीति कोरबा जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए सामाजिक बदलाव का आधार बन रही है। वनवासियों के जीवन स्तर में सुधार से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि यह नीति सतत वन संरक्षण और आय वृद्धि का संतुलित मॉडल बनेगी।