विशेष रिपोर्ट: महतारी वंदना योजना में e-KYC बना मुसीबत, ‘आधार मिसमैच’ के चलते महिलाओं का भविष्य अधर में
बलौदाबाजार/सोनाखान :छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदना योजना’ के तहत वर्तमान में भाजपा सरकार द्वारा लाभार्थियों का e-KYC अनिवार्य रूप से करवाया जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया ने प्रदेश की हजारों महिलाओं की नींद उड़ा दी है। योजना का लाभ निरंतर प्राप्त करने के लिए जारी इस प्रक्रिया में ‘आधार मिसमैच’ (Aadhaar Mismatch) की समस्या एक बड़ी बाधा बनकर उभरी है, जिससे महिलाओं में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है।
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, जब योजना के फॉर्म भरे जा रहे थे, तब कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त तकनीकी प्रशिक्षण नहीं दिया गया था। जानकारी के अभाव में कई फॉर्मों में नाम की स्पेलिंग, उपनाम या पते में त्रुटियां रह गईं। आलम यह है कि कुछ केंद्रों पर कार्यकर्ताओं ने नाम तक सही ढंग से दर्ज नहीं किए, जिसका खामियाजा अब उन गरीब महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है जो हर महीने मिलने वाली 1000 रुपये की राशि पर निर्भर हैं।
वर्तमान में जब महिलाएं e-KYC कराने पहुंच रही हैं, तो पोर्टल पर उनका डेटा आधार कार्ड से मेल नहीं खा रहा है। सर्वर द्वारा ‘मिसमैच’ बताकर आवेदन रिजेक्ट किए जा रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि समस्या के समाधान के लिए जब महिलाएं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के पास जा रही हैं, तो वहां से उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। उचित मार्गदर्शन के अभाव में महिलाएं एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर काट रही हैं।
महिलाओं के बीच अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि:
- क्या पोर्टल पर नाम सुधार का विकल्प खुलेगा?
- क्या सरकार तकनीकी त्रुटि सुधारने के लिए विशेष कैंप लगाएगी?
- या फिर कड़े नियमों और e-KYC के बहाने लाभार्थियों की संख्या में कटौती करने की कोई गुप्त योजना है?
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि डेटा प्रविष्टि (Data Entry) के समय गलती विभाग की ओर से हुई है, तो सुधार की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होनी चाहिए। मांग की जा रही है कि:
- आधार डेटा के आधार पर पोर्टल में ‘ऑटो-करेक्शन’ का विकल्प दिया जाए।
- ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाकर त्रुटि सुधार किया जाए।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तत्काल तकनीकी प्रशिक्षण देकर पोर्टल एक्सेस प्रदान किया जाए।
महतारी वंदना योजना महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक है, लेकिन तकनीकी पेचीदगियां और प्रशासनिक लापरवाही इसे उनके लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बना रही हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस समस्या का त्वरित समाधान निकालती है या महिलाएं यूं ही भटकती रहेंगी।