शहीद वीर नारायण सिंह के सपनों का सोनाखान: जहां विरासत बनी विकास की प्रेरणा

SARJU PRASAD SAHU

July 24, 2026

सोनाखान।  24 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ऐतिहासिक गांव सोनाखान की तस्वीर पिछले दो वर्षों में पूरी तरह बदल गई है। प्रथम छत्तीसगढ़ी स्वतंत्रता सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह की कर्मस्थली यह गांव, जो कभी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में त्रस्त था, आज विकास, स्वाभिमान और जनभागीदारी का एक अनूठा मॉडल बनकर उभरा है। यह परिवर्तन एसबीआई फाउंडेशन की ‘एसबीआई सम्मान – राष्ट्रीय नायकों को श्रद्धांजलि’ पहल और सेंटर फॉर डेवलपमेंट सपोर्ट के सहयोग से संभव हुआ है।

युवाओं को मिला ‘घर-आंगन’ में प्रशिक्षण

गांव में स्थापित ‘शहीद वीर नारायण सिंह युवा प्रशिक्षण केंद्र’ ने युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी है। जहां पहले प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं को दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब यहां आसपास के दस गांवों के 180 से अधिक युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इस केंद्र की बदौलत अब तक 15 युवाओं ने पुलिस शारीरिक परीक्षा, 2 ने शिक्षक पात्रता परीक्षा, 2 ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि 2 युवाओं को पुलिस विभाग में नियुक्ति मिल चुकी है। खेल प्रतिभाओं को भी पहचान मिली है और 12 बच्चों ने ब्लॉक, जिला एवं संभाग स्तर पर पदक जीतकर गांव का नाम रोशन किया।

 

 

 

 

 

 

स्थानीय युवा रामकुमार ने बताया, “पहले हमें कोचिंग के लिए 50 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जो आर्थिक रूप से संभव नहीं था। आज हमें यहां मुफ्त में बेहतर मार्गदर्शन और संसाधन मिलते हैं। मैं भी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा हूं और आत्मविश्वास से भरा हूं।”

 

 

 

 

 

 

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में नई कहानी

शिक्षा के क्षेत्र में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर शिक्षा और विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना से 350 से अधिक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा से जुड़े हैं। वहीं 210 विद्यार्थी विज्ञान प्रयोगों के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।

वहीं, महिला सशक्तिकरण की दिशा में स्थापित ‘प्रेरणा सेंटर’ ने ग्रामीण महिलाओं की किस्मत बदल दी है। यहां सिलाई, कंप्यूटर और रोजगारोन्मुखी कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 150 से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं। इनमें से 30 से अधिक महिलाएं प्रतिमाह 8,000 रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और समाज में उनकी भूमिका भी सशक्त हुई है।

शहीद उद्यान बना पर्यटन और प्रेरणा का केंद्र

गांव में विकसित शहीद वीर नारायण सिंह उद्यान आज इतिहास, पर्यटन और प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस उद्यान में शहीद के जीवन, संघर्ष और विचारों को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है। यहां प्रत्येक माह लगभग 3,000 पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे न केवल स्थानीय व्यापारियों को रोजगार मिला है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछा

ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए ग्राम सेवा केंद्र ने वरदान साबित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में 3,000 से अधिक लोगों को श्रमिक पंजीयन, छात्रवृत्ति और प्रसूति सहायता से जोड़ा गया है। इसके अलावा, आरओ प्लांट से 50-60 परिवारों को शुद्ध पेयजल मिल रहा है, 36 सोलर स्ट्रीट लाइटों ने सुरक्षा बढ़ाई है, और नए हाट-बाजार शेड में 30-35 दुकानें नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। ठोस कचरा प्रबंधन ने गांव को स्वच्छ बनाया है।

एसबीआई फाउंडेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल इमारतें बनाना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नायकों के आदर्शों को जमीनी विकास से जोड़ना है। सोनाखान का यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा है, जहां विरासत स्मारकों में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर नागरिकों में जीवित है।”

आज सोनाखान गवाह बन रहा है कि जब इतिहास और विकास का मिलन होता है, तो वहां स्वाभिमानी और समृद्ध समाज की नींव पड़ती है। शहीद वीर नारायण सिंह को यही सच्ची श्रद्धांजलि है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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