सिम्स बिलासपुर में पहली बार 78 वर्षीय महिला के अंडाशय कैंसर के विशाल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया

SARJU PRASAD SAHU

August 6, 2026

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर ने चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 78 वर्षीय महिला मरीज के अंडाशय में विकसित विशाल कैंसरयुक्त ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया। यह सर्जरी सिम्स में पहली बार इतनी जटिल गायनेकोलॉजिकल कैंसर सर्जरी के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। राहत की बात यह रही कि मरीज का पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।

दर्रीघाट, बिलासपुर निवासी महिला पिछले पांच से छह महीनों से पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द और तेजी से बढ़ रही पेट की गांठ से परेशान थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, जहां ऑपरेशन और इलाज का खर्च करीब दो से तीन लाख रुपये बताया गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार चिंतित हो गया और बाद में मरीज को सिम्स बिलासपुर लाया गया।

सिम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने विस्तृत जांच के दौरान पाया कि मरीज रजोनिवृत्ति के बाद की अवस्था में थीं और उनके बाएं अंडाशय में लगभग 15×12×10 सेंटीमीटर आकार तथा करीब एक किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर विकसित हो चुका था। ट्यूमर का आकार इतना बड़ा था कि वह आसपास के महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव डाल रहा था। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने सोनोग्राफी जांच के माध्यम से इसकी पुष्टि की, जिससे स्पष्ट हो गया कि ऑपरेशन बेहद जटिल और उच्च जोखिम वाला होगा।

इसके बाद विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने मरीज का मूल्यांकन कर 3 अगस्त 2026 को सफल शल्य चिकित्सा की। ऑपरेशन के दौरान कैंसर की स्टेजिंग सर्जरी, ट्यूमर भार कम करने की प्रक्रिया, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालना, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत तथा उसमें डबल-जे स्टेंट प्रत्यारोपण जैसी कई जटिल प्रक्रियाएं एक साथ सफलतापूर्वक की गईं।

इस ऑपरेशन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी के नेतृत्व में डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनरल सर्जरी विभाग से डॉ. रघुराज सिंह, डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा ने सहयोग दिया, जबकि एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा ने ऑपरेशन को सुरक्षित बनाने में अहम योगदान दिया।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि इतने बड़े अंडाशय ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और मूत्रवाहिनी, मूत्राशय तथा आंत जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे मामलों में अनुभवी विशेषज्ञों की टीम, सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और लगातार निगरानी बेहद जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की टीम ने सभी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करते हुए मरीज को नया जीवन दिया।

सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का अंडाशय कैंसर ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ और गंभीर स्थिति मानी जाती है। समय पर सही जांच, विशेषज्ञों का समन्वय और आधुनिक कैंसर सर्जरी की सुविधा के कारण ऐसे जटिल मामलों का सफल इलाज संभव हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जिससे उन्हें उच्चस्तरीय उपचार निःशुल्क मिल रहा है।

फिलहाल ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक है और वे चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। मरीज के परिजनों ने सफल उपचार और निःशुल्क चिकित्सा सुविधा के लिए सिम्स के डॉक्टरों एवं पूरे स्वास्थ्यकर्मी दल के प्रति आभार व्यक्त किया।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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