जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे बच्चे, छत से गिर रहा प्लास्टर

SARJU SAHU

July 8, 2026

देवभोग। सरकार भले ही “पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया” और “सब पढ़ें, सब बढ़ें” जैसे नारों के जरिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। देवभोग क्षेत्र के जामगुरियापारा स्थित सरकारी स्कूल की तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और छत से लगातार सीमेंट व प्लास्टर का मलबा गिर रहा है। इसके बावजूद मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर उसी भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

बारिश के मौसम में स्कूल की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। छत से पानी टपकता है, दीवारों में गहरी सीलन आ चुकी है और जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ रहा है। कक्षाओं में बैठे बच्चों के सिर पर कब छत का कोई हिस्सा गिर जाए, इसका अंदेशा हर समय बना रहता है। ऐसे माहौल में बच्चे पढ़ाई से ज्यादा अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए दिखाई देते हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन वर्षों पुराना हो चुका है और अब यह पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। उनका दर्द साफ झलकता है। अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन डर के साथ अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। यदि बच्चों को स्कूल नहीं भेजें तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी और यदि भेजें तो उनकी जान का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी जा चुकी है। नए भवन के निर्माण और पुराने भवन की मरम्मत की मांग को लेकर कई आवेदन भी सौंपे गए, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। विभाग की उदासीनता के कारण आज भी बच्चे खतरनाक भवन में पढ़ाई करने को विवश हैं।

ग्रामीणों और पालकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल भवन की तत्काल जांच कर जर्जर छत और दीवारों की मरम्मत कराई जाए या फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले ही समस्या का समाधान हो सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खबर के प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन कब तक संज्ञान लेते हैं। कहीं ऐसा न हो कि अधिकारियों की लापरवाही किसी मासूम की जान पर भारी पड़ जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते कार्रवाई करना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

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