छत्तीसगढ़ में परिसीमन से बदल सकता है सियासी नक्शा, 90 से बढ़कर 135 हो सकती हैं विधानसभा सीटें!

TEJASWI NATH SONI

October 28, 2026

राजनीतिक विश्लेषक तरुण खटकर का अनुमान—बलौदाबाजार-भाटापारा में 2 से 3 और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 1 से 2 नई सीटों की संभावना

 

रायपुर/बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ में विधानसभा परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। संभावित परिसीमन के तहत प्रदेश की विधानसभा सीटों की संख्या मौजूदा 90 से बढ़कर 135 होने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, सीटों की संख्या में वृद्धि और नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन अभी अंतिम रूप से तय नहीं है। इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक तरुण खटकर ने प्रदेश के विभिन्न संभागों और जिलों में संभावित सीटों का आकलन प्रस्तुत किया है।

 

यदि विधानसभा सीटों में 50 प्रतिशत तक वृद्धि होती है, तो प्रदेश में करीब 45 नए निर्वाचन क्षेत्र बन सकते हैं। इसका असर राजनीतिक दलों की रणनीति, मौजूदा विधायकों के प्रभाव क्षेत्रों और नए दावेदारों की संभावनाओं पर पड़ सकता है। निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव होने पर कई क्षेत्रों का राजनीतिक समीकरण भी बदल सकता है।

 

संभागवार सीटों का संभावित गणित

 

राजनीतिक विश्लेषक तरुण खटकर के आकलन के अनुसार, यदि विधानसभा की कुल सीटें 135 होती हैं, तो संभागवार संभावित वितरण इस प्रकार हो सकता है:

 

संभाग| वर्तमान सीटें| संभावित सीटें

बिलासपुर| 24| 39

रायपुर| 20| 30

दुर्ग| 20| 30

सरगुजा| 14| 20

बस्तर| 12| 16

कुल| 90| 135

 

यह वितरण संभावित गणना पर आधारित है। वास्तविक सीटों का निर्धारण परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया और लागू मापदंडों के अनुसार ही होगा।

 

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में बढ़ सकती हैं सीटें

 

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी लगभग 10,78,911 थी। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, जिले में 1,105 मतदान केंद्र और 8,21,443 मतदाता हैं। वर्तमान में जिले से बलौदाबाजार, भाटापारा, कसडोल और बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र जुड़े हुए हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषक के अनुमान के अनुसार, परिसीमन के बाद जिले में दो से तीन नई विधानसभा सीटें बनने की संभावना पर चर्चा हो सकती है। इस स्थिति में वर्तमान चार सीटों की संख्या बढ़कर छह या सात तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

 

संभावित नए निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में पलारी, सिमगा तथा गिरौदपुरी-सोनाखान क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन क्षेत्रों को अलग विधानसभा सीट का दर्जा मिलेगा या नहीं, यह परिसीमन की आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी नए निर्वाचन क्षेत्रों की संभावना

 

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की आबादी लगभग 6,07,434 थी। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 651 मतदान केंद्र बताए गए हैं, जबकि विधानसभा क्षेत्रवार मतदान केंद्रों की संख्या 721 बताई गई है। जिले में मतदाताओं की संख्या 5,09,821 दर्ज की गई है।

 

राजनीतिक आकलन के अनुसार, परिसीमन के बाद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में एक से दो नई विधानसभा सीटें बढ़ सकती हैं। वर्तमान में सारंगढ़ और बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्रों वाले इस जिले में बरमकेला और भटगांव को संभावित नए निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो जिले में विधानसभा सीटों की संख्या दो से बढ़कर तीन या चार हो सकती है।

 

हालांकि, इन संभावनाओं की पुष्टि अभी नहीं हुई है। नए निर्वाचन क्षेत्रों का गठन जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक सीमाओं और परिसीमन आयोग के निर्धारित मापदंडों पर निर्भर करेगा।

 

महिला आरक्षण से बढ़ेंगे राजनीतिक अवसर

 

परिसीमन के साथ महिला आरक्षण का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। यदि 135 सदस्यीय विधानसभा में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, तो गणितीय रूप से लगभग 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। इससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और चुनाव लड़ने के अवसर बढ़ने की संभावना है।

 

हालांकि, महिला आरक्षण लागू होने की समयसीमा और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण कानूनी प्रावधानों तथा परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए इसे फिलहाल संभावित परिदृश्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

 

2011 की जनगणना या 2027 के आंकड़े—किस आधार पर होगा परिसीमन?

 

परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि सीटों के निर्धारण में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग होगा या आगामी जनगणना के आंकड़ों का। महिला आरक्षण से संबंधित वर्ष 2023 के संवैधानिक संशोधन में आरक्षण को निर्धारित शर्तों के तहत जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े नए विधेयक भी संसद में पेश किए गए थे, लेकिन संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और संबंधित विधेयकों पर आगे कार्रवाई नहीं हुई। <Cite refs={[“turn114502search24″,”turn114502search22”]}/>

 

इसलिए छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटें 90 से बढ़कर 135 होने, संभागवार सीटों के वितरण और बलौदाबाजार-भाटापारा व सारंगढ़-बिलाईगढ़ में नई सीटें बनने के अनुमानों को अभी अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

 

बदल सकती है चुनावी रणनीति

 

यदि भविष्य में परिसीमन के तहत नए निर्वाचन क्षेत्र बनते हैं, तो राजनीतिक दलों को नए क्षेत्रों में संगठन मजबूत करना होगा। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने, स्थानीय मुद्दों की पहचान करने और नए उम्मीदवारों को आगे लाने की चुनौती भी बढ़ सकती है।

 

रायपुर और बिलासपुर जैसे शहरी विस्तार वाले क्षेत्रों से लेकर बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ इलाकों तक परिसीमन का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। फिलहाल, प्रदेश में सीटों की संख्या बढ़ने और महिला आरक्षण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सभी की नजरें आगामी जनगणना, संसदीय प्रक्रिया और परिसीमन से जुड़े आधिकारिक निर्णयों पर टिकी हैं।

सह संपादक

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