सोनाखान तहसील में लचर व्यवस्था: पटवारी के दोहरे प्रतिवेदन के बाद भी 3 साल से भुंईयां पोर्टल में दर्ज नहीं हुआ किसान का खसरा, धान बेचने को मोहताज

BIRENDRA KUMAR SEN

October 14, 2026

सोनाखान तहसील में लचर व्यवस्था: पटवारी के दोहरे प्रतिवेदन के बाद भी 3 साल से भुंईयां पोर्टल में दर्ज नहीं हुआ किसान का खसरा, धान बेचने को मोहताज

बलौदाबाजार (14 अक्टूबर 2026): छत्तीसगढ़ सरकार जहां किसानों के हित में तमाम दावे कर रही है, वहीं मैदानी स्तर पर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली अन्नदाताओं की कमर तोड़ने पर आमादा है। बलौदाबाजार जिले की सोनाखान तहसील से एक ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक किसान अपनी ही जमीन को सरकारी रिकॉर्ड (भुंईयां पोर्टल) में ऑनलाइन दर्ज कराने के लिए बीते तीन वर्षों से तहसील कार्यालय के चक्कर काटने को विवश है।

मामला सोनाखान तहसील अंतर्गत बया अंचल के ग्राम कुरकुटी (पटवारी हल्का नंबर 10) का है। यहां के कृषक संकर्षण साहू (पिता पुरन) अपनी भूमि स्वामी हक की जमीन को भुंईयां पोर्टल में दर्ज कराने के लिए साल 2023 से लगातार आवेदन दे रहे हैं। स्थानीय पटवारी द्वारा जमीन की मौका जांच और पंचनामा तैयार कर 6 अक्टूबर 2023 तथा 2 मई 2025 को विधिवत जांच प्रतिवेदन तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके बावजूद तहसीलदार द्वारा अब तक खसरे को ऑनलाइन प्रविष्ट नहीं किया गया है, जिसके चलते किसान का काम ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।

समर्थन मूल्य पर फसल बेचने से वंचित, बिचौलियों के चंगुल का खतरा जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज न होने के कारण पीड़ित किसान विगत तीन वर्षों से अपनी खून-पसीने से उपजाई धान की फसल को समर्थन मूल्य पर सहकारी समिति में नहीं बेच पा रहा है। सरकारी उपार्जन केंद्र में पंजीयन न हो पाने की सूरत में किसान को औने-पौने दामों में बिचौलियों और मिलर्स के पास अपनी उपज बेचने की मजबूरी बन रही है, जिससे उसे हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों में आक्रोश, सिस्टम पर उठे सवाल कार्यालयों के अंतहीन चक्कर काटकर अब किसान संकर्षण साहू और उनके परिवार के सब्र का बांध टूटने लगा है। पीड़ित किसान का आरोप है कि स्पष्ट जांच प्रतिवेदन होने के बाद भी केवल प्रक्रिया को अटका कर उन्हें मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। मामले को लेकर क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है और यह सवाल उठने लगा है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसके इशारे पर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर पीड़ित कृषक को न्याय दिलाता है या फिर यह मामला भी लालफीताशाही की भेंट चढ़ा रहेगा।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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