धरती के श्रृंगार मानस परिवार आर्यन ग्रुप एवं ग्रामवासियों के तत्वावधान में हुआ आयोजन, विभिन्न मानस मंडलियों ने दी भावपूर्ण प्रस्तुति,
छुरा /गरियाबंद :- रक्षा बंधन के पावन अवसर पर छुरा विकासखंड के ग्राम भरुवामुड़ा में श्री रामचरित मानसगान का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन किया गया। धरती के श्रृंगार मानस परिवार आर्यन ग्रुप एवं समस्त ग्रामवासियों के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम प्रतिवर्ष रक्षा बंधन के अवसर पर आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में मानसगान कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मानस मंडलियों ने श्री रामचरित मानस की चौपाइयों, भजनों एवं धार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण गायन किया। मानस मंडलियों की मधुर प्रस्तुति से पूरा आयोजन स्थल राममय हो गया। राम नाम और भक्ति गीतों की गूंज के बीच बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए।
मानसगान कार्यक्रम में पुष्पांजलि मानस परिवार पलेमा (छुरा), श्री राम मानस परिवार भलेश्वर, श्री रामदरबार मानस परिवार चितमखार तथा पूजा मानस परिवार चित्रकूट (चिरको), महासमुंद सहित विभिन्न मानस मंडलियों ने अपनी प्रस्तुति दी। मंडलियों द्वारा श्री रामचरित मानस के विभिन्न प्रसंगों का गायन करते हुए उनके धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को प्रस्तुत किया गया।

धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश,
आयोजन समिति के सदस्यों एवं ग्रामवासियों ने बताया कि श्री रामचरित मानसगान के माध्यम से गांव में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। रक्षा बंधन जैसे पवित्र पर्व पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम अब ग्रामीणों के लिए आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का महत्वपूर्ण अवसर बन चुका है।
मानसगान के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और आयोजन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कार्यक्रम में ग्रामीणों की सहभागिता से पूरे गांव में उत्साह और भक्तिमय माहौल देखने को मिला।
बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रद्धालु,
कार्यक्रम में गजेंद्र नायक, महेश नायक, रामजी पटेल, मदन गोपाल ध्रुव, पंकज मरकाम, ईश्वर नायक सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में धरती के श्रृंगार मानस परिवार आर्यन ग्रुप एवं समस्त ग्रामवासियों का विशेष योगदान रहा।
रक्षा बंधन के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने ग्रामीण अंचल में भक्ति, संस्कृति और सामाजिक समरसता की सुंदर मिसाल पेश की।