रिकोकला में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया कमरछठ तिहार।* *संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि एवं स्वस्थ जीवन की कामना लेकर माता-बहनों ने रखा निर्जला व्रत

BIRENDRA KUMAR SEN

September 2, 2026

*रिकोकला में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया कमरछठ तिहार।*

*संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि एवं स्वस्थ जीवन की कामना लेकर माता-बहनों ने रखा निर्जला व्रत*

रिकोकला। संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना को लेकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा का प्रमुख पर्व कमरछठ (हलषष्ठी) ग्राम रिकोकला के कदम चौक, आमापारा चौक एवं ब्राम्हण पारा में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गांव की माता-बहनों ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर अपनी संतान के दीर्घायु एवं सुखमय जीवन की कामना की।

कदम चौक, आमापारा चौक एवं ब्रह्मपारा सहित तीन स्थानों में हुई पूजा।

कमरछठ पर्व को लेकर सुबह से ही गांव में धार्मिक एवं उत्सव का माहौल देखने को मिला। व्रत रखने वाली महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा की तैयारियां कीं। महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा स्थल पर पहुंचीं और वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान बलराम जी एवं कमरछठ माता का स्मरण किया। पूजा के दौरान महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति एवं परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

पंडित शशिभूषण त्रिवेदी ने कराया विधिवत पूजन

ग्राम रिकोकला में आयोजित कमरछठ की पूजा ग्राम रिकोकला के ही निवासी पंडित शशिभूषण त्रिवेदी के द्वारा विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गई। उन्होंने कमरछठ पर्व की धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना कराई तथा उपस्थित माता-बहनों को पर्व के महत्व से अवगत कराया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया।

संतान की दीर्घायु के लिए रखा व्रत
कमरछठ पर्व विशेष रूप से माताओं की आस्था और संतान के प्रति उनके अटूट स्नेह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और निरोगी जीवन की कामना करते हुए कठिन व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान पारंपरिक नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है और कमरछठ की कथा का श्रवण किया जाता है।

ग्राम रिकोकला में भी माता-बहनों ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ व्रत रखा। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। गांव में बच्चों एवं परिवार के सदस्यों के बीच भी कमरछठ को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

लोकपरंपरा और संस्कृति से जुड़ा है पर्व

कमरछठ केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रदेश की प्राचीन लोकपरंपराओं एवं संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कमरछठ की परंपरा पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ निभाई जाती है।
ग्राम रिकोकला में आयोजित पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की और परिवार एवं समाज में सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।
माता-बहनों ने कहा कि कमरछठ का व्रत उनके लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी संतान के प्रति प्रेम, ममता और मंगलकामना की अभिव्यक्ति है। संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन के लिए माताएं श्रद्धा से यह व्रत रखती हैं।

इस अवसर पर ग्राम रिकोकला की बड़ी संख्या में माता-बहनें एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात सभी ने परिवार की सुख-समृद्धि एवं संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

जिला रिपोर्टर बलौदा बजार

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