बसना। देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर 7.8 प्रतिशत होने का दावा करते हुए सरकार द्वारा विकास की उपलब्धियां गिनाए जाने के बीच बसना विधानसभा के सक्रिय कांग्रेस नेता एवं जिला पंचायत सदस्य मोक्ष कुमार प्रधान ने महंगाई को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापनों में GDP ग्रोथ के आंकड़े दिखाने के बजाय सरकार को यह भी बताना चाहिए कि महंगाई के कारण आम आदमी की रसोई और जेब पर कितना अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि GDP के आंकड़े बढ़ना निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन विकास का वास्तविक लाभ तब माना जाएगा, जब किसान, मजदूर, गरीब, महिला, युवा, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवारों के जीवन में भी सुधार दिखाई दे। उन्होंने कहा कि आज आम परिवार बढ़ती रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों से परेशान है और आय तथा खर्च के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है।
‘GDP के साथ महंगाई का रिपोर्ट कार्ड भी जारी करे सरकार’
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि यदि सरकार GDP ग्रोथ को अपनी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रख रही है, तो उसे महंगाई का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड भी सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले कुछ वर्षों में आम आदमी की रसोई का खर्च कितना बढ़ा, किसानों की खेती की लागत कितनी बढ़ी और ग्रामीण मजदूरों तथा मध्यमवर्गीय परिवारों की वास्तविक क्रय शक्ति में कितना बदलाव आया।
उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री, सब्जियां, दाल, तेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, खेती की लागत और घरेलू जरूरतों से जुड़े खर्चों ने आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित किया है।
GDP बढ़ रही है तो आम आदमी को राहत क्यों नहीं?
कांग्रेस नेता ने कहा कि गांव का किसान, खेतिहर मजदूर, छोटा दुकानदार और नौकरीपेशा मध्यमवर्गीय परिवार आज कमाई और खर्च के बीच बढ़ते अंतर से जूझ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, इलाज, खेती की लागत, खाद-बीज, डीजल और घरेलू सामान पर होने वाला खर्च लगातार परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों में आर्थिक विकास दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। विकास का असली अर्थ तब है, जब उसका फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लोगों की क्रय शक्ति मजबूत हो।
सरकार से पूछे ये सवाल
मोक्ष कुमार प्रधान ने सरकार से मांग की कि जनता के सामने महंगाई को लेकर स्पष्ट आंकड़े रखे जाएं। उन्होंने पूछा—
▪️ रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में कितना बदलाव आया?
▪️खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों का परिवारों के बजट पर कितना असर पड़ा?
▪️किसानों की खेती की लागत कितनी बढ़ी?
▪️ग्रामीण मजदूरों की वास्तविक क्रय शक्ति में कितना बदलाव आया?
▪️ पेट्रोल-डीजल और बिजली की कीमतों का आम परिवारों पर कितना असर पड़ा?
▪️महंगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार ने जमीनी स्तर पर कौन-कौन से प्रभावी कदम उठाए?
उन्होंने कहा, “जनता केवल GDP का प्रतिशत नहीं खाती, जनता को अपने घर की रसोई चलानी है। विकास का पैमाना केवल कागज और होर्डिंग्स नहीं, बल्कि आम आदमी के घर की खुशहाली और उसकी क्रय शक्ति भी होनी चाहिए।”
‘हकीकत होर्डिंग्स से नहीं, जनता की जेब से पता चलती है’
मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि सरकार चाहे जितने बड़े होर्डिंग्स और विज्ञापन लगाए, लेकिन आम आदमी को बाजार में वास्तविक महंगाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति की असली तस्वीर विज्ञापनों में नहीं, बल्कि बाजार की कीमतों और परिवारों के घरेलू बजट में दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि यदि GDP ग्रोथ मजबूत है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्थिक विकास का लाभ किसान, मजदूर, महिला, युवा, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवारों तक पहुंचे।
‘जनता को आंकड़ों की चमक नहीं, रसोई में राहत चाहिए’
कांग्रेस नेता ने कहा कि महंगाई कोई महज कागजी आंकड़ा नहीं, बल्कि हर परिवार की रोजमर्रा की समस्या है। सुबह की चाय से लेकर बच्चों की शिक्षा और परिवार के इलाज तक बढ़ता खर्च सीधे आम आदमी की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है।
उन्होंने शासन से मांग की कि महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और ग्रामीण जनता को राहत देने वाली नीतियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जनता को केवल विकास के आंकड़ों की चमक नहीं, बल्कि रसोई में राहत, जेब में बचत और जीवन में वास्तविक खुशहाली चाहिए।
अंत में मोक्ष कुमार प्रधान ने कहा कि सरकार को GDP ग्रोथ का जश्न मनाने के साथ-साथ महंगाई की मार झेल रही जनता की आवाज भी सुननी चाहिए। देश तभी मजबूत होगा, जब आर्थिक विकास का लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और आम आदमी सम्मान के साथ अपना घर चला सके।