बस्तर दशहरा 2026: मां दन्तेश्वरी के साथ रथ पर आसीन होंगे महाराजा कमलचंद्र भंजदेव-कृष्ण चरण पटेल

SARJU SAHU

August 31, 2026

रायपुर। बस्तर की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक शाही दशहरा परंपरा में बस्तर महाराजा कमलचंद्र भंजदेव को मां दन्तेश्वरी के साथ रथारूढ़ कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इस मांग को लेकर राजस्व ग्राम पटेल संघ छत्तीसगढ़ ने बड़ा कदम उठाते हुए बस्तर के राजमहल परिसर में प्रदेशभर के ग्राम पटेलों की विशाल बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। संगठन के प्रदेश प्रवक्ता एवं बलौदाबाजार जिलाध्यक्ष कृष्णचरण पटेल ने बताया कि प्रस्तावित बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में संगठन अपनी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखेगा।

कृष्णचरण पटेल के अनुसार, संगठन ने विगत वर्ष भी बस्तर महाराजा को परंपरागत रूप से रथ में आसीन कराने के लिए प्रशासन से आग्रह किया था। उस दौरान कई घंटे तक चली बातचीत और प्रयासों के बाद प्रशासन की ओर से आगामी वर्ष में विधिवत स्वीकृति दिए जाने का आश्वासन मिला था। इसी क्रम में राजस्व ग्राम पटेल संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा और बस्तर की परंपरागत शाही दशहरा में महाराजा कमलचंद्र भंजदेव एवं महारानी को मां दन्तेश्वरी के साथ रथारूढ़ कराने की मांग रखी।

विवाह के बाद फिर उठी रथारूढ़ कराने की मांग

संगठन के प्रदेश प्रवक्ता कृष्णचरण पटेल ने बताया कि महाराजा कमलचंद्र भंजदेव के पिता के निधन के बाद महाराजा के अविवाहित होने के कारण वे रथारूढ़ होने की परंपरा से वंचित रह गए थे। अब महाराजा का विवाह हो चुका है और बस्तर को महारानी भी मिल चुकी हैं। ऐसे में संगठन का कहना है कि इस बार महाराजा एवं महारानी को मां दन्तेश्वरी के साथ पारंपरिक रूप से रथ पर आसीन कराया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बैठक में शामिल होने की सहमति दी

कृष्णचरण पटेल ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष संगठन की मांगों और पिछले वर्ष की परिस्थितियों से विस्तार से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने बस्तर में आयोजित होने वाली ग्राम पटेलों की बैठक में शामिल होने के लिए अपनी सहमति व्यक्त की है। बैठक की तिथि महाराजा के माध्यम से संगठन को साझा किए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने संगठन की मांगों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रशासनिक स्वीकृति की दिशा में पहल करने का आश्वासन भी दिया है।

मुख्यमंत्री की सहमति के बाद राजस्व ग्राम पटेल संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों में उत्साह का माहौल है। संगठन का दावा है कि प्रदेश में कार्यरत लगभग 17 हजार ग्राम पटेल बस्तर में होने वाली इस प्रादेशिक बैठक में शामिल होंगे।

मानदेय और संवैधानिक अधिकारों की मांग भी उठेगी

संगठन ने स्पष्ट किया है कि बस्तर महाराजा एवं महारानी को रथारूढ़ कराने की मांग के साथ-साथ ग्राम पटेलों के मासिक मानदेय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा। कृष्णचरण पटेल ने कहा कि संगठन इस बार अपनी मांगों को लेकर पूरी मजबूती के साथ आवाज उठाएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी संगठन के सदस्यों ने रथारूढ़ कराने की मांग को लेकर कई घंटे तक प्रयास किया था। प्रशासन की ओर से आश्वासन और राजमाता के आदेश के बाद रथ आगे बढ़ पाया था। संगठन अब चाहता है कि आगामी शाही दशहरा से पहले इस विषय पर विधिवत प्रशासनिक निर्णय लिया जाए, ताकि परंपरा और संगठन की मांग दोनों का सम्मान हो सके।

मुख्यमंत्री निवास में प्रतिनिधिमंडल रहा मौजूद

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित मुलाकात के दौरान राजस्व ग्राम पटेल संघ के प्रदेश एवं जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें कृष्णचरण पटेल जिलाध्यक्ष बलौदाबाजार, अनंतराम कश्यप संभागीय अध्यक्ष बस्तर, केशराम पंकज जिलाध्यक्ष सारंगढ़, कृष्णा जैन प्रांताध्यक्ष, राजेश चंद्राकर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, अमर कश्यप अध्यक्ष शिवरीनारायण, ईश्वर पटेल उपाध्यक्ष, दुर्गेश साहू अध्यक्ष टुण्डरा, शंकर साहू सचिव टुण्डरा सहित मुकेश्वर कश्यप, भानु साहू, राज साहू, कुंजराम रात्रे, बुलाकी राम, मोहन मंडावी, रामपाल यादव, गणेश चंदेल, मन्नूलाल साहू, मोहन गिलहरे, घनश्याम साहू, हेमंत कुर्रे, ज्ञान सिंह ठाकुर, पुरनसिंह ठाकुर, नंदकुमार, अवधेश समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजस्व ग्राम पटेल संघ छत्तीसगढ़ की आगामी बस्तर बैठक को संगठन ने ऐतिहासिक रूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। महाराजा कमलचंद्र भंजदेव एवं महारानी को मां दन्तेश्वरी के साथ शाही दशहरा के रथ में आसीन कराने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की प्रस्तावित बैठक में मौजूदगी और प्रशासनिक स्वीकृति के आश्वासन के बाद ग्राम पटेल संघ को उम्मीद है कि इस वर्ष बस्तर की पारंपरिक शाही दशहरा में महाराजा-महारानी की रथारूढ़ परंपरा को लेकर सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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