पूर्व सहायक आयुक्त बी.एल. ध्रुव ने 31 वर्षों में लिखी हरियाली की मिसाल, 200 से अधिक पौधे बने विशाल वृक्ष

TOSHAN PRASAD CHOUBEY

August 5, 2026

1995-96 में शुरू किया था वृक्षारोपण अभियान, आज गांव की सड़कें और तालाब किनारे लहलहा रहे बरगद, पीपल, नीम व आम के पेड़; बांसबिनौरी में फिर हुआ सैकड़ों पौधों का रोपण

बलौदाबाजार/पलारी,  वन संरक्षण की बातें तो अक्सर होती हैं, लेकिन उसे तीन दशक तक अपने कर्मों से साबित करने वाले लोग विरले ही मिलते हैं। विकासखंड पलारी के ग्राम बांसबिनौरी में पूर्व सहायक आयुक्त, परिवहन विभाग छत्तीसगढ़ बी.एल. ध्रुव ने ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 1995-96 में स्वर्गीय मोहन सिंह ध्रुव की प्रेरणा से शुरू किया गया उनका वृक्षारोपण अभियान आज 31 वर्षों बाद हरियाली की ऐसी विरासत बन चुका है, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का केंद्र है। करीब तीन दशक पहले दर्रीपार तालाब, बड़े तालाब, नवाडीह मार्ग और गांव की विभिन्न सड़कों के किनारे लगाए गए बरगद, पीपल, नीम और आम सहित 200 से अधिक पौधे आज विशाल और छायादार वृक्ष बन चुके हैं। इन वृक्षों ने न केवल गांव की तस्वीर बदल दी है, बल्कि गर्मी में राहगीरों को छाया, पक्षियों को आश्रय और ग्रामीणों को स्वच्छ वातावरण भी उपलब्ध कराया है। इसी हरित संकल्प को आगे बढ़ाते हुए रविवार को ग्राम बांसबिनौरी में वृक्षारोपण महाअभियान आयोजित किया गया। बी.एल. ध्रुव ने अपने परिवार और समाजसेवी मनोज ध्रुव के साथ स्वयं के व्यय से ग्राम के भाटा मैदान सहित विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों पौधों का रोपण किया। खास बात यह रही कि केवल पौधे लगाकर औपचारिकता नहीं निभाई गई, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए प्रत्येक पौधे के चारों ओर पत्थरों का घेरा बनाकर संरक्षण की जिम्मेदारी भी तय की गई। कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी मनोज ध्रुव ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बीते 31 वर्षों से किए जा रहे उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्व सहायक आयुक्त बी.एल. ध्रुव का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया। ग्रामीणों ने भी उनके प्रयासों को अनुकरणीय बताते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया। ग्राम पंचायत बांसबिनौरी के सरपंच प्रतिनिधि संतलाल धीरहे, उपसरपंच प्रमिला ध्रुव, पंचगण, वरिष्ठ नागरिक, मातृशक्ति, युवा शक्ति एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण इस अभियान के साक्षी बने। कार्यक्रम का संचालन भानु ध्रुव ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कमलेश ध्रुव ने किया।

खास बात

31 साल पहले लगाया पौधा… आज बना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
बी.एल. ध्रुव ने यह साबित कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संकल्प और सतत प्रयास से भी हरियाली की नई इबारत लिखी जा सकती है। बांसबिनौरी आज इस सोच का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।

प्रबंध संपादक (Managing Editor)

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