
रिपोर्टर टेकराम कोसले
रायपुर/कोरबा, 15 जुलाई 2026। शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा आयोजित “स्व. श्री हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह–2026” का भव्य आयोजन बुधवार को रायपुर के विमतारा, मधु पिल्ले चौक, शांति नगर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 250 उत्कृष्ट शिक्षकों को शिक्षा, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस प्रतिष्ठित समारोह में कोरबा जिले के सात नवाचारी शिक्षकों ने अपनी उपलब्धियों से जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। सम्मानित शिक्षकों में श्रीमती निर्मला शर्मा (पाली), श्री शांतिलाल कश्यप (पौड़ी उपरोड़ा), श्री संतोष कर्ष (पाली), श्रीमती श्रद्धा शर्मा (पाली), श्रीमती नंदिनी राजपूत (पाली), श्रीमती दीपिका देवांगन (करतला) और श्री लोकनाथ सेन (करतला) शामिल रहे। इन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
शिक्षक ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति: डॉ. हिमांशु द्विवेदी
समारोह के मुख्य अतिथि हरिभूमि समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में राजा भी अपने गुरुओं के सम्मान के लिए हर प्रकार का त्याग करने को तैयार रहते थे, क्योंकि शिक्षक ही राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कई स्थानों पर शिक्षकों की भूमिका को केवल एक कर्मचारी तक सीमित करने का प्रयास दिखाई देता है, जबकि समाज को इस विषय पर गंभीर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य नहीं गढ़ता, बल्कि राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और सभ्यता का निर्माण करता है। ऐसे समर्पित शिक्षकों का सम्मान पूरे समाज का सम्मान है तथा शिक्षा में नवाचार और नैतिक मूल्यों का समन्वय ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा।
स्व. हरिवंश मिश्र के आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूर्णानंद मिश्रा ने कहा कि स्वर्गीय श्री हरिवंश मिश्र के शिक्षा, अनुशासन और समाज सेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर उनके कार्यों को नई पहचान देती रहेगी।
संस्था के संरक्षक मनोज वर्मा ने कहा कि सम्मानित शिक्षक समाज के वास्तविक प्रेरणास्रोत हैं। उनका समर्पण नई पीढ़ी को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की दिशा प्रदान करता है तथा ऐसे आयोजन शिक्षकों के मनोबल को नई ऊर्जा देते हैं।
व्यक्तित्व निर्माण ही शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व
विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि शिक्षक का कार्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करना है। राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला सम्मान प्रत्येक शिक्षक को और अधिक उत्कृष्ट कार्य करने की प्रेरणा देता है।
समारोह के दौरान स्वर्गीय श्री हरिवंश मिश्र, भूतपूर्व प्रधानपाठक के शिक्षा, अनुशासन और समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित अतिथियों ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि उनके आदर्श सदैव शिक्षकों और समाज के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
देशभर के शिक्षकों की रही गरिमामय उपस्थिति
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में देशभर से आए शिक्षकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामय उपस्थिति रही। सम्मानित शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत की इस अभिनव पहल की सराहना की और इसे शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी अभियान बताया।
संस्था के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जितेन्द्र मिश्रा ने सभी अतिथियों, सम्मानित शिक्षकों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “जब एक शिक्षक सम्मानित होता है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था, उसके विद्यार्थी और राष्ट्र का भविष्य सम्मानित होता है।” उन्होंने कहा कि यही भावना इस राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह की सबसे बड़ी विशेषता है।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राष्ट्रीय महासचिव मोहन लहरी ने किया तथा राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा महत्वपूर्ण योगदान
इस राष्ट्रीय आयोजन को सफल बनाने में दिजेंद्र कुर्रे, प्रेमचंद साव, डॉ. प्रज्ञा सिंह, रिंकल बग्गा, तरुण कुमार दास, पीतांबर मानिकपुरी, अजय कुमार जायसवाल, जितेन्द्र मिश्रा, रूद्र नारायण तिवारी, वीरेंद्र कुमार कर, रीता पति, शैलेन्द्र नायक, मनोज मुच्छावड़, योगेश सिंह ठाकुर, गायत्री मिश्रा, एम.एन. वर्मा, आनंद शर्मा सहित राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।