6 साल से टूटा पुल, नहीं मिली सरकारी मदद; ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से शुरू कराया आवागमन

TEJASWI NATH SONI

July 10, 2026

बालमदेही नदी पर क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत नहीं होने से 25 से 30 गांव प्रभावित, ग्रामीणों ने ईंट-सीमेंट से बनाई अस्थायी दीवार

बलौदाबाजार/बारनवापारा, 10 जुलाई 2026। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से वर्षों तक गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही जिम्मेदारी संभाल ली। बारनवापारा से भोथाही, अमेठी घाट होते हुए जिला मुख्यालय बलौदाबाजार को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर बालमदेही नदी के क्षतिग्रस्त पुल पर ग्रामीणों ने आपसी सहयोग, चंदा और श्रमदान से अस्थायी मरम्मत कर आवागमन फिर से शुरू करा दिया।

जानकारी के अनुसार पाड़दाह और सैहाभाठा के बीच वन क्षेत्र में स्थित बालमदेही नदी पर वर्ष 2005-06 में पुल का निर्माण हुआ था। वर्ष 2019 में हुई भारी बारिश के दौरान पुल का बीच का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे पुल का स्लैब (लेंटर) झूल गया और सुरक्षित आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। तब से हर वर्ष ग्रामीण टूटे हिस्से में मुरुम डालकर अस्थायी रास्ता बनाते रहे, लेकिन बारिश में वह बह जाता था।

इस वर्ष 5 और 6 जुलाई को हुई बारिश के बाद भी पुल पर डाला गया मुरुम बह गया, जिससे स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और दैनिक यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं। तत्काल कोई सरकारी राहत नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने स्वयं चंदा एकत्र कर पुल के दोनों ओर ईंट और सीमेंट की मजबूत दीवार बनाई तथा बीच में मुरुम भरकर अस्थायी रूप से आवागमन बहाल कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है और किसी भी समय फिर क्षतिग्रस्त हो सकती है, लेकिन लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा।

इस जनसहयोग अभियान में लोकनाथ रात्रे, धरम रात्रे, अश्वनी कैवर्त, इंद्रा कुमार प्रभाकर, गंगादेव चतुर्वेदी सहित अनेक ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग और श्रमदान कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले छह वर्षों में कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आवेदन देकर पुल के पुनर्निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि 25 से 30 गांवों के हजारों लोगों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

सह संपादक

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