काज़ीरंगा (असम), 6 जुलाई 2026। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सबसे बहादुर और विश्वसनीय हथिनियों में शामिल ‘जॉयमाला’ को 5 जुलाई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। लगभग 34 वर्षों तक वन विभाग के साथ मिलकर वन्यजीवों की सुरक्षा, बचाव अभियान और शिकारियों के खिलाफ गश्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली जॉयमाला के निधन से वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में शोक की लहर है।
वर्ष 1960 में जन्मी जॉयमाला ने 1992 में काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सेवा शुरू की थी। इसके बाद तीन दशक से अधिक समय तक उसने घने जंगलों, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में वन रक्षकों एवं महावतों के साथ मिलकर वन्यजीव संरक्षण का दायित्व निभाया।
जॉयमाला ने कई रेस्क्यू ऑपरेशन और एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उसकी बहादुरी और शांत स्वभाव के कारण वन विभाग की टीम उसे सबसे भरोसेमंद साथी मानती थी।
जॉयमाला से जुड़ी सबसे चर्चित घटना वर्ष 2004 की रही, जब जंगल में गश्त के दौरान एक भटका हुआ बाघ अचानक उसके ऊपर से छलांग लगाकर निकल गया था। इस रोमांचक घटना की तस्वीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं और काज़ीरंगा के वन संरक्षण प्रयासों की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था।
पिछले लगभग एक वर्ष से जॉयमाला बीमारी से जूझ रही थी। उपचार के बावजूद 5 जुलाई को उसका निधन हो गया। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने उसकी दशकों लंबी सेवा और वन्यजीव संरक्षण में योगदान को सम्मान देते हुए गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। यह सम्मान उन बहादुर रक्षकों को दिया जाता है जिन्होंने अपने कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण दिखाया हो।
वन अधिकारियों ने कहा कि जॉयमाला केवल एक हथिनी नहीं थी, बल्कि काज़ीरंगा की सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा और वन्यजीव संरक्षण की जीवंत प्रतीक थी। उसके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।