कोरबा | पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के कारण चर्चा में है। हाल ही में कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी प्रदीप मिश्रा के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा कथित रिश्वतखोरी की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। इसी बीच एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की शिकायत ने विभागीय व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जानकारी के अनुसार, शासकीय सेवा से 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए भृत्य पलटन राम यादव ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें उनका स्वत्व भुगतान तथा पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी नहीं किया गया। जबकि उसी दिन सेवानिवृत्त हुए प्रधान पाठक राजेन्द्र तिवारी और व्याख्याता सुखनंदन सिंह पैकरा को उनके सभी सेवानिवृत्ति लाभ समय पर उपलब्ध करा दिए गए थे।शिकायत में पलटन राम यादव ने आरोप लगाया कि कार्यालय स्तर पर उनकी फाइल जानबूझकर लंबित रखी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित आर्थिक मांग पूरी नहीं करने के कारण उनके प्रकरण में अनावश्यक विलंब किया गया। सेवानिवृत्ति के बाद भी भुगतान और पीपीओ नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। मामला कलेक्टर जनदर्शन तक पहुंचने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ। शिकायत के परीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए पलटन राम यादव का स्वत्व भुगतान और पीपीओ जारी कर दिया गया। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन शिकायत के बाद तत्काल कार्रवाई होने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।गौरतलब है कि इससे पहले भी पोड़ी उपरोड़ा बीईओ कार्यालय भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहा है। हाल ही में सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी प्रदीप मिश्रा को एक सेवानिवृत्त शिक्षक से कथित रूप से रिश्वत लेते हुए एसीबी द्वारा रंगे हाथों पकड़े जाने की कार्रवाई ने पूरे शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी थी। इस घटना के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी। अब एक के बाद एक सामने आ रही शिकायतों ने बीईओ कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि शिक्षा विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। फिलहाल, इस पूरे मामले में प्रशासन की आगे की कार्रवाई और संभावित जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। विभागीय स्तर पर यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे कर्मचारियों की लंबित शिकायतों और कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों पर भी प्रकाश पड़ सकता है।
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