महासमुंद खाद्य अधिकारी समेत तीन गिरफ्तार, 87 टन एलपीजी गैस के 80 लाख रुपये गबन का खुलासा

SARJU PRASAD SAHU

May 9, 2026

महासमुंद जिला खाद्य अधिकारी निकला जब्त एलपीजी कैप्सूल से 1.5 करोड़ के गैस गबन का मुख्य षड्यंत्रकारी पंकज चंद्राकर एवं रायपुर के मनीष चौधरी को दी गई थी एजेंसी ढूंढने और गबन क्रियान्वयन की जिम्मेदारी

बसना। थाना सिंघोडा में दिसंबर 2025 में जब्त 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षित रखवाने का मामला अब गैस गबन के बड़े षड्यंत्र में बदल गया है। जिला कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग ने ये ट्रक ठाकुर पेट्रो केमिकल्स को सुपुर्द किए, लेकिन जांच में पता चला कि 87 टन एलपीजी (कीमत करीब 77 लाख रुपये) का अपहरण कर लिया गया। अब इस मामले में खाद्य अधिकारी अजय यादव समेत तीन आरोपी गिरफ्तार हुए हैं।

कब हुई षड्यंत्र की शुरुआत?

23 मार्च को पुलिस अधीक्षक के पत्र के बाद खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने पहली बैठक की। इसमें 1 करोड़ रुपये के गबन की पटकथा लिखी गई। पंकज को क्रियान्वयन और सही एजेंसी ढूंढने की जिम्मेदारी दी गई, और उसने रायपुर के मनीष चौधरी का नाम सुझाया।

कैसे हुआ मूल्यांकन?

26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोडा थाना पहुंचे और 6 कैप्सूल में कुल 105 मीट्रिक टन गैस का अनुमान लगाया। उसी रात तीनों षड्यंत्रकारियों की एक एजेंसी मालिक से बैठक हुई, लेकिन उसने इनकार कर दिया। बाद में मनीष चौधरी ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स (संतोष ठाकुर) से डील पक्की की – 80 लाख रुपये में।

किसकी क्या जिम्मेदारी?

· अजय यादव (खाद्य अधिकारी): परदे के पीछे मुख्य खिलाड़ी, 50 लाख रुपये का हिस्सा मिला।
· पंकज चंद्राकर: गबन का चेहरा और क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी।
· मनीष चौधरी: रायपुर की एजेंसियों से संपर्क कर डील को अंतिम रूप देना।

पैसे के लेन-देन का क्रम

80 लाख की डील फाइनल हुई। सुपुर्दगी के अगले दिन (31 मार्च) अजय यादव को 50 लाख रुपये घर पर मिले। शेष 30 लाख ठाकुर ने मनीष चौधरी के खाते में सुरक्षा के तौर पर जमा किए। बाद में ठाकुर ने मनीष को 30 लाख दिए – मनीष ने 10 लाख रखे, 20 लाख पंकज को दे दिए। फिर मनीष ने ठाकुर के खाते में 30 लाख वापस कर दिए।

कूटरचित वजन पंचनामा

कैप्सूल खाली होने के बाद 6 और 8 अप्रैल को बिना ठाकुर या गवाह के फर्जी वजन पंचनामा खाद्य अधिकारी के कार्यालय में बनाया गया। इसमें मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर को ही स्वतंत्र गवाह बनाया गया – वही जिन्होंने 92 टन गैस का गबन किया। हैरानी की बात यह कि यह दस्तावेज 8 अप्रैल को दोपहर में कलेक्टोरेट पहुंच गया, जबकि वजन उसी दिन रात 8 बजे के बाद हुआ था।

पल्ला झाड़ने की योजना

20 अप्रैल की रात आरंग के ढाबे में पंकज, मनीष और संतोष ठाकुर ने सब कुछ पुलिस पर डालने और अपने बयान एक जैसे रखने की योजना बनाई।

गिरफ्तार आरोपी

1. पंकज चंद्राकर – 35 वर्ष, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, महासमुंद
2. मनीष चौधरी – 52 वर्ष, लखजोरा अपार्टमेंट, रायपुर
3. अजय कुमार यादव – 49 वर्ष, राजकिशोर नगर, बिलासपुर (वर्तमान आवास महासमुंद)

पुलिस मामले में और गहराई से जांच कर रही है।

संपादक { विज्ञापन‍ }

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