हरदी बाजार में जल जीवन मिशन की पाइप से लदे दो माजदा व दो हाइड्रा जब्त, ठेकेदार पर FIR की तैयारी – पानी के लिए तरसते गांव, अफसर-ठेकेदार की मिलीभगत से हो रही पाइप की चोरी
कोरबा। 27 अप्रैल 2026 भीषण गर्मी में प्यासे तरस रहे कोरबा जिले के 245 से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने की 668.85 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी बांगो बांध पाइपलाइन परियोजना में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। हरदी बाजार थाना पुलिस ने जल जीवन मिशन की करोड़ों रुपये की पाइप से लदे दो माजदा ट्रक और दो हाइड्रा क्रेन को रंगे हाथों जब्त किया है। चालकों के पास न तो परिवहन का कोई वैध दस्तावेज था और न ही बिल। पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पाइप विभागीय स्टोर से रात के अंधेरे में निकाली जा रही थी, जिसे बाद में अवैध रूप से बाजार में खपाया जाना था।
ग्रामीण प्यासे, गोदाम से गायब हो रही पाइप मिनीमाता बांगो बांध से कटघोरा, पाली और पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंडों के 446 गांवों तक 891 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद दर्दनाक है। साल 2025 तक भी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और 16 बड़ी टंकियों का निर्माण अधूरा है। पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में फ्लोराइड दूषित जल पीने को मजबूर ग्रामीण आज भी सूखे हैंडपंपों के सहारे जीवन बसर कर रहे हैं।
इस बीच, परियोजना से जुड़ी एचडीपीई और डीआई पाइपों का अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर पनप रहा है। हरदी बाजार पुलिस ने गश्त के दौरान कटघोरा रोड स्थित एक सुनसान गोदाम के पास संदिग्ध हालत में खड़े दो माजदा ट्रकों और दो हाइड्रा क्रेनों को देखा। वाहनों की तलाशी लेने पर उनमें जल जीवन मिशन की नील रंग की मोटी पाइप बरामद हुई। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बरामद पाइपों का कुल बाजार मूल्य लगभग 1.5 करोड़ रुपये आंका गया है।
पुलिस के अनुसार, चालकों ने बताया कि पाइपें पास के सरकारी स्टोर से रात्रि में बिना किसी औपचारिकता के निकाली गईं और इन्हें छत्तीसगढ़ के बाहर के बाजारों में सस्ते दामों पर बेचा जाना था। फिलहाल चारों वाहनों को सीज कर दिया गया है और दो चालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
कौन है जिम्मेदार? उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
1. ठेकेदार की मनमानी – क्या ठेकेदार फर्म विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी पाइप चुराकर अवैध संग्रहालय में बेच रही है?
2. विभागीय संरक्षण – बिना विभागीय स्टोरकीपर और कार्यपालन अभियंता की जानकारी के इतनी बड़ी मात्रा में पाइप स्टोर से कैसे निकली? क्या सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है?
3. गुणवत्ता पर संकट – चोरी की गई कंपनी की मूल पाइप की जगह कहीं घटिया और मानक से कम पाइप तो नहीं लगाई जा रही? यह आशंका जल गुणवत्ता पर भी खतरा पैदा करती है।
4. देरी का खेल – क्या जानबूझकर परियोजना के काम को लटकाया जा रहा है ताकि लागत बढ़े, ठेकेदार को और भुगतान मिले और कमीशन का खेल निर्बाध रूप से चलता रहे?
प्रशासन में हड़कंप, होगी बड़ी कार्रवाई जैसे ही मामला प्रकाश में आया, जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से एसडीएम कटघोरा की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी है। जिला पंचायत सीईओ को भी मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के कार्यपालन अभियंता और एसडीओ को तलब करके स्पष्टीकरण मांगा गया है।
पुलिस ने ठेकेदार फर्म के खिलाफ IPC की धारा 407 (अमानत में खयानत), धारा 408 (कर्मचारी द्वारा संपत्ति की चोरी) और धारा 379 (चोरी) के तहत एफआईआर दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही, राज्य के जल जीवन मिशन कार्यालय की एक टीम भी कोरबा रवाना की जा रही है। दोषी पाए जाने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर वसूली की जाएगी। विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच होगी।
पीएचई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, यह पूरी तरह से शासकीय संपत्ति के अपहरण का मामला है। हम सभी को जिम्मेदार ठहराए जाने के पक्ष में हैं। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।
ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी इस परियोजना से लाभान्वित होने वाले गांवों के ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। बुधवार को कई गांवों के प्रतिनिधियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। मोहनपुर निवासी रामेश्वर यादव ने कहा, 668 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन हमें आज तक एक बूंद भी नसीब नहीं हुई। पाइपें सरकारी अफसर और ठेकेदार मिलकर चुरा रहे हैं। हम 48 घंटे के अंदर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट को घेरेंगे और कटघोरा-पाली हाइवे पर चक्का जाम करेंगे।
ग्राम सुरक्षा समिति के प्रमुख रामलाल कश्यप ने चेतावनी दी कि अगर अगले सप्ताह तक पाइप चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के दृश्य परिणाम नहीं दिखे, तो वे जनता कर्फ्यू बुलाने पर मजबूर होंगे।
परियोजना एक नजर में पैरामीटर विवरण
➡️ कुल लागत 668.85 करोड़ रुपये
➡️ पाइपलाइन लंबाई 891 किलोमीटर
➡️ लाभान्वित गांव 245 से 446 गांव (चरणों में)
➡️ प्रभावित ब्लॉक कटघोरा, पाली, पोड़ी-उपरोड़ा
➡️ उद्देश्य 30 साल तक जल संकट से मुक्ति, फ्लोराइड मुक्त पेयजल
➡️ अनुमोदन वर्ष 2020-21
निर्धारित पूर्णता दिसंबर 2024 (अब बढ़कर दिसंबर 2027)
अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद शासन प्यासे गांवों को न्याय दिलाता है, या फिर यह फाइल भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी। पिछले तीन वर्षों में इस परियोजना पर तीन बार जांच समितियाँ बन चुकी हैं, लेकिन कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सीबीआई जांच कराकर पूरे मामले का पर्दाफाश हो, तथा दोषी चाहे जिस भी स्तर का अधिकारी या ठेकेदार हो, उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए।