पीडीएस चावल की खरीदी का बदला पैटर्न, अब घर-घर पहुंच रहे मुनाफाखोर

SARJU PRASAD SAHU

March 24, 2026

देवभोग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के चावल की अवैध खरीदी-बिक्री पर लगातार खबरें सामने आने और खाद्य विभाग की सख्त कार्रवाई के बाद अब मुनाफाखोरों ने अपना तरीका बदल लिया है। पहले जहां यह कारोबार गोदामों और दुकानों के माध्यम से संचालित होता था, वहीं अब सीधे ग्रामीणों के घरों तक पहुंचकर चावल खरीदने का सिलसिला शुरू हो गया है।

सूत्रों के अनुसार देवभोग ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में कुछ मिलर्स को नान और एफसीआई को बचत चावल की आपूर्ति करनी है। ऐसे में वे अपनी कमी पूरी करने के लिए पीडीएस चावल पर निर्भर हो गए हैं। बताया जा रहा है कि धान के बदले चावल देने में अधिकांश मिलर्स लगभग 70 प्रतिशत तक सफल हो चुके हैं, जबकि शेष लक्ष्य पूरा करने के लिए अवैध तरीकों का सहारा लिया जा रहा है।

इसी कड़ी में गांव-गांव के दुकानदारों के माध्यम से हितग्राहियों से सीधे घरों में जाकर चावल खरीदा जा रहा है। हाल ही में बरकानी गांव का एक मामला सामने आया, जहां एक हितग्राही ने करीब चार बोरा चावल देवभोग के एक व्यापारी को 19 रुपये प्रति किलो की दर से बेच दिया।

जानकारों का कहना है कि अब दुकानों की बजाय घरों में पहुंचकर चावल खरीदे जाने से इस अवैध कारोबार का पता लगाना और भी मुश्किल हो गया है। मुनाफाखोरों ने गांव स्तर पर अपना नेटवर्क तैयार कर लिया है, जिससे बड़ी मात्रा में चावल एकत्र किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले पीडीएस चावल की खरीदी-बिक्री को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद खाद्य अधिकारी केतन राणा ने देवभोग और धौरकोट सहित कई गांवों में छापेमार कार्रवाई की थी, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी। माना जा रहा है कि कार्रवाई की सूचना पहले ही लीक हो जाने के कारण मुनाफाखोर सतर्क हो गए थे।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए पीडीएस चावल के इस अवैध कारोबार पर रोक लगाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि कलेक्टर स्तर पर निगरानी और सख्त जांच के साथ समन्वित कार्रवाई की जाए, तभी इस पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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