बलौदाबाजार। कसडोल विकासखंड अंतर्गत सोनाखान स्थित भगवान कुर्रुपाठ मंदिर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों पर मंदिर परिसर में तोड़फोड़ करने तथा वर्षों से प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति को क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार महाशिवरात्रि की सुबह डीएफओ गणवीर धम्मशील, सोनाखान वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं विभागीय कर्मचारियों की टीम जंगल स्थित कुर्रुपाठ मंदिर पहुंची। आरोप है कि मंदिर परिसर में लगाए गए छाया पंडाल को हटाया गया तथा लगभग चार वर्षों से जल रही अखंड ज्योति को नुकसान पहुंचाया गया।
आस्था का प्रमुख केंद्र
यह स्थल छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह से जुड़ा हुआ माना जाता है। उनके वंशज राजेंद्र दीवान ने बताया कि सोनाखान क्षेत्र के 18 टोला अंतर्गत 24 गांवों की आस्था इस स्थान से जुड़ी है। मान्यता है कि वीर नारायण सिंह यहां पूजा-अर्चना करते थे तथा इसी क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध उनका संघर्ष हुआ था।
आदिवासी समाज कुर्रुपाठ भगवान को कुल देवता के रूप में पूजता है और यहां प्रतिवर्ष मेला भी आयोजित किया जाता है।
ग्रामीणों के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि—
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मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की गई।
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पंडाल हटाया गया।
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अखंड ज्योति को नुकसान पहुंचाया गया।
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धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
महाशिवरात्रि जैसे पवित्र दिन हुई इस कार्रवाई से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। बड़ी संख्या में लोग सोनाखान चौकी पहुंचे और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए आवेदन सौंपा।
वन विभाग का पक्ष
डीएफओ गणवीर धम्मशील ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा,
“नीचे झोपड़ी बनाकर अतिक्रमण किया गया था, उस पर पीआर काटकर कार्रवाई की गई है। मंदिर में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की गई।”
जांच की मांग
ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि वन विभाग इसे अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया बता रहा है।
मामले में सच्चाई क्या है, यह प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और लोगों की नजर जांच प्रक्रिया पर टिकी है।